भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा की गई एक तात्कालिक दलील के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने आज दिए गए अपने आदेश को अपलोड न करने का निर्णय लिया। इस आदेश में राष्ट्रपति से यह अनुरोध किया गया था कि वह मौत की सजा पाने वाले दोषी बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय लें।
आदेश पर पुनर्विचार की मांग
सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ में जस्टिस बी.आर. गवई, जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन शामिल थे, जिन्होंने आज सुबह खुले अदालत में इस आदेश को जारी किया। लेकिन सुबह की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित नहीं थे। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका का फाइल गृह मंत्रालय के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
SC ने आदेश पर विचार किया
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने तुषार मेहता की दलील पर सहमति जताते हुए कहा कि मामले को सोमवार को फिर से सुना जाएगा। जस्टिस गवई ने इस दौरान स्पष्ट किया, "हम वह आदेश पारित नहीं कर रहे हैं।" इसका मतलब था कि अभी इस मामले में कोई अंतिम निर्णय या आदेश नहीं दिया जाएगा। अदालत ने यह कदम सरकार से और निर्देश मिलने तक स्थगित कर दिया है, और अगले सप्ताह इस मामले पर फिर से विचार किया जाएगा।
बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका
बलवंत सिंह राजोआना, जिसे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी, ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में उन्होंने यह तर्क दिया है कि उनकी दया याचिका पर फैसला करने में अत्यधिक देर हो चुकी है और इसलिए उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।
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