नई दिल्ली - राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने हाल ही में मुस्लिम समुदाय के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले 12 वर्षों में मुस्लिम समुदाय के कई युवाओं को भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती किया गया है।
सभी नागरिक नाविक हैं
अजीत डोभाल ने कहा कि भारत एक विशाल जहाज की तरह है। सभी नागरिक नाविक हैं। हम या तो एक साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं या फिर एक साथ डूबते हैं। मुस्लिम समुदाय को सरकार के इरादे पर कभी संदेह नहीं करना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) ने कहा कि, सशस्त्र बलों में भर्ती यह दर्शाती है कि भारत में मुसलमानों के प्रति कोई पूर्वाग्रह या भेदभाव नहीं है।
धार्मिक पहचान में समाहित न करें
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) डोभाल ने कहा कि, कई पहचानों को अपनाना महत्वपूर्ण है। यह स्वयं को एक धार्मिक पहचान तक सीमित करने से बेहतर है। इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि, यह महत्वपूर्ण है कि मुसलमान अपनी विविध पहचानों को एक धार्मिक पहचान में समाहित न करें और उसे सर्वोच्च न मानें।
मुसलमानों को अपनी धार्मिक पहचान का पूरा अधिकार है
एनएसए इस महीने नई दिल्ली में शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उद्योगपतियों के एक प्रतिनिधिमंडल को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों की तरह मुसलमानों की भी बहुआयामी और बहुस्तरीय पहचान होती है। भ्रम तब पैदा होता है, जब व्यक्ति अपनी अलग पहचान को लेकर अत्यधिक सचेत हो जाता है।उन्होंने कहा कि इससे कभी-कभी निराधार पीड़ित होने की भावना पैदा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों को अपनी धार्मिक पहचान का पूरा अधिकार है।