नई दिल्ली. केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जरूरतमंद परिवारों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। इसी क्रम में अंत्योदय अन्न योजना के तहत राशन वितरण की मौजूदा व्यवस्था में संशोधन का प्रस्ताव सामने आया है। अभी तक योजना के पात्र प्रत्येक परिवार को सदस्यों की संख्या की परवाह किए बिना प्रतिमाह 35 किलोग्राम खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन प्रस्तावित संशोधन के अनुसार अब प्रति व्यक्ति सात किलोग्राम अनाज देने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। हालांकि कुल वितरण की अधिकतम सीमा 35 किलोग्राम प्रतिमाह ही निर्धारित रखने का प्रस्ताव है, जिससे योजना का मूल उद्देश्य भी सुरक्षित रह सके।
क्यों महसूस हुई नई व्यवस्था की आवश्यकता?
सरकार का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई बड़े अंत्योदय परिवारों को प्रति व्यक्ति अपेक्षाकृत कम मात्रा में खाद्यान्न प्राप्त होता है, जबकि वे आर्थिक रूप से सबसे कमजोर वर्ग में शामिल हैं। दूसरी ओर, कम सदस्यों वाले परिवारों को प्रति व्यक्ति अधिक अनाज उपलब्ध हो जाता है। इस असमानता को समाप्त करने के उद्देश्य से प्रति व्यक्ति आधारित वितरण प्रणाली पर विचार किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप खाद्यान्न वितरण अधिक संतुलित और न्यायसंगत बन सकेगा, जिससे योजना का लाभ जरूरतमंद लोगों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचने की संभावना है।
संशोधन विधेयक पर मांगे गए हैं आम जनता के सुझाव
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 के मसौदे के रूप में सार्वजनिक किया है। सरकार ने नागरिकों, विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों तथा अन्य हितधारकों से 13 जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। सरकार का उद्देश्य व्यापक जनभागीदारी के माध्यम से ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जो व्यावहारिक होने के साथ-साथ समाज के सबसे कमजोर वर्गों के हितों की बेहतर रक्षा कर सके। सुझावों के अध्ययन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
प्राथमिकता श्रेणी और अंत्योदय योजना के बीच असमानता होगी दूर
वर्तमान में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत प्राथमिकता श्रेणी के लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम खाद्यान्न दिया जाता है, जबकि अंत्योदय परिवारों को प्रति परिवार 35 किलोग्राम अनाज मिलता है। कई बार अधिक सदस्यों वाले अंत्योदय परिवारों को प्रति व्यक्ति मिलने वाली मात्रा प्राथमिकता श्रेणी के बराबर या उससे भी कम हो जाती है। सरकार का मानना है कि सबसे गरीब वर्ग के साथ इस प्रकार की स्थिति उचित नहीं है। प्रस्तावित संशोधन इसी व्यावहारिक असमानता को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर रहेगा विशेष जोर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। सभी जिलों में विशेष अभियान चलाकर उचित मूल्य की दुकानों का सघन निरीक्षण कराया जाएगा। यदि कहीं भी कालाबाजारी, कम तौल, पात्र हितग्राहियों को राशन न देना, रिकॉर्ड में गड़बड़ी अथवा किसी अन्य प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित विक्रेता के विरुद्ध तत्काल नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। इससे पात्र परिवारों तक निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न पहुंचाने की व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।
गरीब परिवारों के लिए क्या होगा संभावित प्रभाव?
यदि प्रस्तावित संशोधन को अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो बड़े परिवारों को उनकी वास्तविक सदस्य संख्या के अनुरूप अधिक संतुलित खाद्यान्न मिलने की संभावना बनेगी। वहीं पांच या उससे अधिक सदस्यों वाले परिवारों के लिए अधिकतम 35 किलोग्राम की सीमा पूर्ववत लागू रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक न्यायपूर्ण और लाभार्थी-केंद्रित बना सकता है। हालांकि अंतिम स्वरूप सरकार द्वारा प्राप्त सुझावों और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अंतिम निर्णय से पहले बनी रहेगी वर्तमान व्यवस्था
फिलहाल यह केवल प्रस्तावित संशोधन है और मौजूदा राशन वितरण प्रणाली में तत्काल कोई बदलाव लागू नहीं हुआ है। जब तक विधेयक को मंजूरी नहीं मिलती और संशोधित नियम अधिसूचित नहीं होते, तब तक अंत्योदय अन्न योजना के लाभार्थियों को वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही खाद्यान्न मिलता रहेगा। सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लिए जाने के बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी होगी, इसलिए लाभार्थियों को केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की सलाह दी जा रही है।