नई दिल्ली: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य क्षमता, रणनीतिक सोच और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बताते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी उकसावे पर भारत किस तरह सटीकता, दृढ़ता और निर्णायक तरीके से जवाब दे सकता है। सेना प्रमुख ने कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में देश की रक्षा करने वालों को तेज सोच, मजबूत नेतृत्व और आधुनिक युद्ध की समझ के साथ आगे बढ़ना होगा।
ऑपरेशन सिंदूर बना भारत की ताकत का प्रतीक
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को सटीकता और दृढ़ संकल्प के साथ अभिव्यक्त करने का एक नया मानदंड स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े किसी भी खतरे का जवाब देने में सक्षम है।
'हाइब्रिड युद्ध के दौर में बदल रही हैं चुनौतियां'
सेना प्रमुख ने कहा कि वर्तमान समय में सुरक्षा चुनौतियां लगातार जटिल होती जा रही हैं। विवादित क्षेत्रों से लेकर हाइब्रिड वॉरफेयर तक, हर मोर्चे पर सैनिकों को तेजी से सोचने और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि आज का युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि कई स्तरों पर लड़ा जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में दिखी तीनों सेनाओं की एकजुटता
जनरल द्विवेदी ने कहा कि मई 2025 में पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचे के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सैन्य बलों की एकीकृत प्रतिक्रिया देखने को मिली। उन्होंने इसे संयुक्तता और समन्वय की मिसाल बताते हुए कहा कि यही भावना राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में पहले दिन से सिखाई जाती है। उन्होंने कैडेटों से कहा कि चाहे भविष्य में वे किसी भी सैन्य शाखा में सेवा दें, लेकिन देशहित में सभी को कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा।
'मैं वर्दी उतार रहा हूं, आप पहनने जा रहे हैं'
अपने संबोधन में सेना प्रमुख भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि 42 वर्ष पहले वह स्वयं इसी परेड ग्राउंड से पास आउट हुए थे और आज अपने सैन्य जीवन के अंतिम पड़ाव पर खड़े हैं। उन्होंने कहा, "आज मैं अपनी वर्दी उतारने की तैयारी कर रहा हूं, जबकि आप सभी अपनी वर्दी पहनने जा रहे हैं। लेकिन यहां सीखे गए मूल्य और आदर्श जीवनभर आपके साथ रहेंगे।"
विदेशी कैडेटों का भी किया जिक्र
जनरल द्विवेदी ने 12 मित्र देशों से आए 24 विदेशी कैडेटों का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भले ही वे अलग-अलग देशों से आए हों, लेकिन एनडीए में उन्होंने समान मूल्यों, अनुशासन और नेतृत्व की भावना सीखी है, जो उन्हें जीवनभर मार्गदर्शन देगी।
युवाओं को दिया नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का संदेश
सेना प्रमुख ने युवा कैडेटों से देशहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक सैनिक की पहचान केवल उसकी वर्दी से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण से होती है।