हेमांशा मेहता
इन दिनों हेट स्पीच शब्द काफी चर्चाओं में है। सोशल मीडिया पर नफरती कंटेंट रोकने के लिए लंबे समय बाद केंद्र सरकार ने एंटी हेट स्पीच कानून बनाने की तैयारी अब शुरु कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के साथ ही अन्य देशों के कानूनों और अभिव्यक्ति की आजादी के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। और इसे जल्द ही सार्वजनिक राय जानने के लिए पेश किया जाएगा। इसमें हेट स्पीच की परिभाषा स्ष्ट हो सकेगी, ताकि लोगों को भी पता रहे कि जो बात वे बोल या लिख रहे हैं, वह कानून के दायरे में आती है या नहीं।
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क्या है कानूनी व्याख्या ?
हेट स्पीच को लेकर अभी अलग से कोई कानून व्यवस्था नहीं है। लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार पर कुछ लगाम कसते हुए एक तरह से हेट स्पीच को परिभाषित किया गया है। संविधान के आर्टिकल 19 के मुताबिक अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार पर 8 किस्म के प्रतिबंध है।
राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ दोस्ताना संबंध, लोक व्यवस्था, शालीनता या नैतिकता, कोर्ट की अवहेलना, मानहानि, हिंसा भड़काऊ, देश की अखंडता व संप्रभुता। इनमे से किसी बिंदु के तहत अगर कोई बयान या लेख आपत्तिजनक पाया जाता है तो उसके खिलाफ सुनवाई और कार्यवाई के प्रावधान हैं।
क्या है सजा ?
इंडिया कानून पोर्टल पर दिए गए विवरण के आधार पर भारतीय दंड विधान यानी आईपीसी के सेक्शन 153(A) के तहत प्रावधान है कि अगर धर्म,नस्ल,जन्मस्थान,रिहाइश,भाषा,जाति या समुदाय या अन्य ऐसे किसी आधार पर भेदभावपूर्ण रवैया के चलते बोला या लिखा गया कोई भी शब्द अगर किसी भी समूह विशेष के खिलाफ नफरत,रंजिश की भावनाएं भड़काता है या सोहार्द का माहौल बिगड़ता है, तो ऐसे में दोषी को तीन साल का सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
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