कोलकाता : पश्चिम बंगाल में पहली भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने शुरुआती मंत्रिमंडल के जरिए बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश देने की कोशिश की है। शनिवार को ब्रिगेड मैदान में पांच मंत्रियों ने शपथ ली। भाजपा सूत्रों का कहना है कि इस कैबिनेट का गठन पूरी रणनीति और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया गया है।
मतुआ और राजबंशी वोट बैंक पर खास फोकस
भाजपा ने अपने शुरुआती मंत्रिमंडल में उन समुदायों को प्राथमिकता दी है, जिन इलाकों में पार्टी को चुनाव में बड़ी सफलता मिली। मतुआ समाज के प्रमुख चेहरे अशोक कीर्तनिया को मंत्री बनाकर भाजपा ने उत्तर 24 परगना में अपना मजबूत संदेश दिया है। वहीं उत्तर बंगाल के राजबंशी नेता निशीथ प्रमाणिक को कैबिनेट में शामिल कर पार्टी ने उत्तर बंगाल की राजनीति को साधने की कोशिश की है।
आदिवासी चेहरे को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी
राढ़ बंगाल और जंगलमहल क्षेत्र में भाजपा की बढ़ती ताकत को देखते हुए आदिवासी नेता क्षुदिराम टुडू को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा आदिवासी इलाकों में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।
दिलीप घोष की एंट्री से RSS को बड़ा संदेश
पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को कैबिनेट में शामिल करना सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा बन गया है। संगठन और RSS से लंबे समय तक जुड़े रहे दिलीप घोष को भाजपा का मजबूत रणनीतिक चेहरा माना जाता है। पार्टी नेताओं का मानना है कि सरकार में उनकी मौजूदगी संगठन और प्रशासन के बीच तालमेल बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी।
महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने की कोशिश
भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अग्निमित्रा पाल को मंत्रिमंडल में शामिल कर पार्टी ने महिला नेतृत्व को भी प्रमुखता दी है। विधानसभा और संगठन दोनों स्तर पर सक्रिय रहने वाली अग्निमित्रा को भाजपा का मजबूत महिला चेहरा माना जाता है।
जल्द होगा मंत्रिमंडल का विस्तार
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, यह सिर्फ शुरुआती कैबिनेट है और आने वाले दिनों में इसका विस्तार किया जाएगा। उत्तर बंगाल, कोलकाता और दक्षिण बंगाल से कई नए चेहरों को भी सरकार में शामिल किया जा सकता है।