नई दिल्ली: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान क्रांतिकारी भगत सिंह की 118वीं जयंती पर रविवार को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। 28 सितंबर 1907 को जन्मे भगत सिंह ने बेहद कम उम्र में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना और अपने विचारों, साहस तथा बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन में अलग पहचान बनाई। उनकी जयंती के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित कर उनके योगदान को याद किया गया।
पंजाब के बंगा गांव में हुआ था जन्म
भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को तत्कालीन पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में स्थित है। उनका परिवार पहले से ही देश की आजादी के आंदोलन से जुड़ा हुआ था। वे सात भाई-बहनों में से एक थे और परिवार में उन्हें प्यार से ‘भागांवाला’ कहा जाता था, जिसका अर्थ ‘भाग्यशाली’ बताया जाता है।
कम उम्र में ही क्रांतिकारी विचारों से हुए प्रभावित
भगत सिंह ने किशोरावस्था से ही देश की राजनीतिक परिस्थितियों और अंग्रेजी शासन को करीब से समझना शुरू कर दिया था। पढ़ने-लिखने में उनकी गहरी रुचि थी और जेल में रहने के दौरान भी उन्होंने साहित्य, इतिहास, समाज और अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर काफी अध्ययन किया। उनके लेखन और विचारों से उनके राजनीतिक दृष्टिकोण और समाज को लेकर उनकी सोच की झलक मिलती है।
विधानसभा की घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा
8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका और गिरफ्तारी दी। यह कार्रवाई ब्रिटिश सरकार की ओर से लाए जा रहे पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल के विरोध में की गई थी। बाद में अदालत में दिए गए अपने बयान में दोनों ने अपनी कार्रवाई के उद्देश्य को स्पष्ट किया था। इस घटना ने भगत सिंह को देशभर में चर्चित कर दिया।
जेल में भी जारी रही विचारों की लड़ाई
गिरफ्तारी के बाद भगत सिंह को जेल में रखा गया। इस दौरान उन्होंने कई विषयों पर अध्ययन किया और लेखन भी किया। उनके उपलब्ध लेखन से पता चलता है कि वे केवल सशस्त्र क्रांति तक सीमित नहीं थे, बल्कि समाज, राजनीति, इतिहास और आर्थिक व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार करते थे।
राजगुरु और सुखदेव के साथ दिया सर्वोच्च बलिदान
लाहौर षड्यंत्र मामले में भगत सिंह को राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी की सजा दी गई। 23 मार्च 1931 को तीनों क्रांतिकारियों को फांसी दी गई। उस समय भगत सिंह की उम्र महज 23 वर्ष थी। इतनी कम उम्र में देश के लिए दिया गया उनका बलिदान स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में हमेशा याद किया जाता रहा है।
खटकड़ कलां में राज्य स्तरीय कार्यक्रम
118वीं जयंती के अवसर पर पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर स्थित खटकड़ कलां में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह वही गांव है, जिसे भगत सिंह की पैतृक भूमि के रूप में जाना जाता है। कार्यक्रम में अमर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर नवनिर्मित 100 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज को भी फहराया गया।
आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं भगत सिंह
भगत सिंह का जीवन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर की याद दिलाता है, जब युवा क्रांतिकारी देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर रहे थे। उनके विचार, लेखन और बलिदान आज भी स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। 118वीं जयंती पर देश ने उन्हें याद करते हुए उनके योगदान और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।