भारत में 80 और 90 के दशक तक कैम्पा एक जाना-पहचाना नाम था, जिसकी मिठास और स्वाद से भारतीय बाजार भरा रहता था। समय के साथ विदेशी पेय ब्रांडों ने इस देसी कंपनी को धीरे-धीरे पीछे धकेल दिया, लेकिन वर्ष 2022 में जब रिलायंस समूह के प्रमुख मुकेश अंबानी ने मात्र 22 करोड़ रुपये में कैम्पा को खरीद लिया तो सॉफ्ट ड्रिंक बाजार में नए युग की शुरुआत हो गई। इस सौदे के बाद यह साफ हो गया कि भारतीय बाजार में अब एक बड़ा बदलाव आने वाला है और विदेशी कंपनियों को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ेगा।
बाजार में प्रतिस्पर्धा का बदलता समीकरण
रिलायंस ने कैम्पा को वर्ष 2023 में फिर से बाजार में उतारा और शुरुआत से ही इस बात पर जोर दिया कि आम उपभोक्ता तक इसे आसान कीमत पर पहुंचाया जाए। कैम्पा को सिर्फ 10 रुपये की कीमत पर उपलब्ध कराना इसकी सबसे मजबूत रणनीतियों में से एक साबित हुआ। पेप्सी और कोक जैसे विदेशी ब्रांडों ने इसे प्रारंभ में गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन समय बीतते-बीतते यह कम कीमत उनकी बेचैनी का कारण बन गई। उपभोक्ता तेज़ी से कैम्पा की ओर लौटने लगे, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा का माहौल तेजी से बदलने लगा।
मजबूत नेटवर्क से बनी नई पहचान
रिलायंस के पास देशभर में विशाल वितरण नेटवर्क है, जिसका लाभ कैम्पा को पूरी तरह मिला। जियो मार्ट, रिलायंस स्मार्ट और खुदरा दुकानों के व्यापक नेटवर्क ने कैम्पा को घर-घर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह वह क्षमता है जो विदेशी कंपनियों के लिए चुनौती खड़ी कर रही है। कैम्पा की इस पहुंच ने स्पष्ट संदेश दिया कि आम उपभोक्ता को सस्ता, सुलभ और भरोसेमंद विकल्प मिल जाए तो बाजार के बड़े खिलाड़ी भी अपनी हिस्सेदारी गंवा सकते हैं।
तेजी से बढ़ती बाजार हिस्सेदारी
कैम्पा की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2024 में जहां इसकी बाजार हिस्सेदारी सिर्फ 2 प्रतिशत थी, वहीं तेजी से बढ़ते उपभोग और रिलायंस की आक्रामक रणनीतियों ने इसे बढ़ाकर 7 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। यह वृद्धि न सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक उद्योग के इतिहास में उल्लेखनीय है, बल्कि विदेशी ब्रांडों के लिए चिंता का विषय भी बन चुकी है। रिटेल दुकानों से लेकर घरों तक कैम्पा की तेजी से हो रही वापसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देसी ब्रांड अब पहले जितने कमजोर नहीं हैं।
बढ़ता रेवेन्यू और बड़े सपने
वित्त वर्ष 2025 में कैम्पा का राजस्व लगभग 1000 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया, जो इसकी तेज़ वृद्धि का संकेत है। हालांकि यह अभी भी विदेशी कंपनियों के मुकाबले काफी कम है, लेकिन रिलायंस की लंबी रणनीति स्पष्ट करती है कि कैम्पा को अब सिर्फ भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रखा जाएगा। आने वाले वर्षों में नए फ्लेवर, नवाचारपूर्ण पैकेजिंग, आधुनिक विपणन और व्यापक उपलब्धता के साथ कैम्पा को एक बड़े वैश्विक ब्रांड में बदलने की तैयारी जोर-शोर से जारी है।
देसी ब्रांड की नई पहचान
कैम्पा की यह वापसी केवल एक व्यापारिक सफलता नहीं है, बल्कि भारतीय आत्मविश्वास और घरेलू ब्रांडों के प्रति बढ़ती आस्था का प्रतीक बन चुकी है। इसने यह सिद्ध किया है कि सही दृष्टि, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी रणनीतियों के साथ कोई भी देसी ब्रांड वैश्विक ब्रांडों को चुनौती दे सकता है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व में कैम्पा ने पुनः सिद्ध कर दिया है कि भारत का बाजार अब केवल खरीदार नहीं, बल्कि निर्माता की भूमिका में भी उतना ही सशक्त है।
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