मध्यमग्राम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में नया और बेहद सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। इस हमले का प्रत्यक्षदर्शी रहे चंद्रनाथ के सहयोगी मंटू मंडल अब भी गहरे मानसिक सदमे में हैं। परिवार का कहना है कि घटना के कई दिन बाद भी मंटू रात के उस खौफनाक मंजर को याद कर कांप उठते हैं। बारासात के विजयनगर निवासी मंटू उस रात चंद्रनाथ रथ की गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे थे। उनके सामने ही हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर चंद्रनाथ की हत्या कर दी, जबकि ड्राइवर बुद्धदेव बेरा गंभीर रूप से घायल हो गए। बुद्धदेव अब भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
हमलावरों को हर मूवमेंट की जानकारी थी
मंटू ने सीआईडी को दिए बयान में बताया कि हमला बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया। जैसे ही उनकी गाड़ी मुजीबर रोड स्थित एक बहुमंजिला इमारत के पास पहुंची, तभी अचानक एक चार पहिया वाहन ने रास्ता रोक लिया। मंटू के मुताबिक, हमलावरों को पहले से पता था कि चंद्रनाथ रथ किस सीट पर बैठे हैं। एक शूटर ने सामने के शीशे से सीधे चंद्रनाथ के सिर और सीने को निशाना बनाया, जबकि दूसरे हमलावर ने ड्राइवर की तरफ से फायरिंग की। उन्होंने बताया कि पूरी वारदात महज 45 सेकंड के भीतर खत्म हो गई और आरोपी मौके से फरार हो गए। अपनी जान बचाने के लिए मंटू सीट के नीचे झुक गए थे। जांचकर्ताओं का मानना है कि गाड़ी के काले शीशों की वजह से हमलावर मंटू को देख नहीं पाए और इसी कारण उनकी जान बच गई।
घायल ड्राइवर को खुद अस्पताल लेकर पहुंचे मंटू
घटना के बाद मंटू ने हिम्मत दिखाते हुए घायल ड्राइवर बुद्धदेव बेरा को खुद अस्पताल पहुंचाया। परिवार के अनुसार, चंद्रनाथ रथ उस समय खून से लथपथ पड़े थे और बुद्धदेव दर्द से तड़प रहे थे। मंटू खुद गाड़ी चलाना जानते थे। भारी डर और दहशत के बावजूद उन्होंने घायल ड्राइवर को पीछे की सीट पर खींचा और तेजी से अस्पताल की ओर रवाना हुए। हालांकि, उनका आरोप है कि रास्ते में किसी स्थानीय व्यक्ति ने उनकी मदद नहीं की आखिरकार उन्होंने जेशोर रोड स्थित एक नर्सिंग होम में गाड़ी रोकी। वहां विधानसभा का स्टिकर देखकर कर्मचारियों ने तुरंत दोनों घायलों को अंदर पहुंचाया।
परिवार बोला- आज भी डर के साये में जी रहा है मंटू
मंटू के भाई झंटू मंडल ने बताया कि पूरा परिवार उन्हें मानसिक तौर पर संभालने की कोशिश कर रहा है। घटना के बाद से वह लगातार भय और तनाव में हैं। परिवार का मानना है कि अगर स्थानीय लोग तुरंत मदद करते तो घायल ड्राइवर का इलाज और पहले शुरू हो सकता था। फिलहाल सीआईडी मंटू मंडल के बयान को इस पूरे हत्याकांड की सबसे अहम कड़ी मान रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमलावरों को चंद्रनाथ रथ की हर गतिविधि की इतनी सटीक जानकारी आखिर कैसे मिली।