अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि जिस पाकिस्तान को भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश की थी, वही अब अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पार्टी ने इसे भारत की विदेश नीति के लिए एक गंभीर सवाल बताया है।
जयराम रमेश का सरकार पर निशाना
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर अप्रत्यक्ष रूप से कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति ‘स्वयं-घोषित विश्वगुरु की कूटनीतिक विफलता’ को दर्शाती है। रमेश ने सवाल उठाया कि कैसे पाकिस्तान, जिसे भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग करने की कोशिश करता रहा, वह अब एक अहम कूटनीतिक भूमिका में नजर आ रहा है।
पिछली कूटनीति और मौजूदा स्थिति पर तुलना
कांग्रेस ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान को अलग-थलग करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मौजूदा विदेश नीति की तुलना की। पार्टी ने कहा कि पिछली सरकारों के समय पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने में अधिक सफलता मिली थी, जबकि वर्तमान स्थिति में भारत की कूटनीतिक पकड़ कमजोर दिखाई दे रही है।
वैश्विक वार्ता और रणनीतिक तनाव
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता पाकिस्तान में हो रही है। बताया जा रहा है कि बातचीत का उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को कम करना है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ रहा है, क्योंकि दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है। इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता भी बढ़ा दी है।