प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सिविल सेवा अधिकारियों से देश की एकता और अखंडता से कोई समझौता ना करने का आह्वान करते हुए कहा है कि कोई भी फैसला लेने से पहले उन्हें एकता और अखंडता की तराजू में जरूर तौलना चाहिए। सिविल सेवा दिवस के मौके पर यहां स्थित विज्ञान भवन में लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए पुरस्कार प्रदान करने के बाद सिविल सेवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए मोदी जी ने कहा कि उन्हें अपने फैसलों में ये अवश्य देखना चाहिए कि वो देश की एकता और अखंडता में कहीं रुकावट पैदा तो नहीं करेगा।
सिविल सेवा अधिकारियों के सामने तीन लक्ष्य साफ
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सिविल सेवा अधिकारियों के सामने तीन लक्ष्य साफ-साफ होने चाहिए और इनमें कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, पहला लक्ष्य है कि देश के सामान्य से सामान्य जन के जीवन में बदलाव लाना। उन्हे इसका अहसास भी हो कि सरकार से मिलने वाले लाभों के लिए उन्हें जद्दोजहद ना करनी पड़े। हमें उनके सपनों को संकल्प में बदलना है। इसके लिए साकारत्मक वातावरण बनाना वयवस्था की जिम्मेदारी है।
देश की एकता और अखंडता। यह लक्ष्य कभी भी ओझल नहीं होना चाहिए
प्रधानमंत्री ने दूसरा लक्ष्य वैश्विक परिस्थितियों के अनुरुप नवीनता और आधुनिकता को अपनाना और तीसरा लक्ष्य एकता व अखंडता से समझौता ना कराना बताया। उन्होंने कहा, वयवस्था में हम कहीं पर भी हों, लेकिन जिस व्यवस्था से हम निकले हैं उसमें हमारी प्राथमिकता जिम्मेदारी है, देश की एकता और अखंडता। यह लक्ष्य कभी भी ओझल नहीं होना चाहिए। इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
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एकता और अखंडता में वह बाधक या रूकावट पैदा तो नहीं करेगा
पीएम ने कहा, ‘कोई भी निर्णय, चाहे कितना भी लोकलुभावन हो या आकर्षक हो, उसे उस तराजू पर जरूर तौलिए कि कहीं देश की एकता और अखंडता में वह बाधक या रूकावट पैदा तो नहीं करेगा।’ केन्द्र और राज्य सरकारों के संगठनों और जिलों द्वारा जन हित के असाधारण और अभिनव कार्यों को सम्मानित करने के लिए ये पुरस्कार दिए जाते हैं। इस वर्ष प्राथमिकता के आधार पर 5 कार्यक्रमों के लिए 10 पुरस्कार दिए गए। केन्द्र और राज्य सरकार के संगठनों और जिलों को नवाचार के लिए 6 पुरस्कार प्रदान किये गए।
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