भारत में जब भी कोई बड़ा तकनीकी सम्मेलन आयोजित होता है, तो आमतौर पर बातचीत आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, नए निवेश, भविष्य की योजनाओं और नवाचारों पर केंद्रित होती है। मंच पर दुनिया के बड़े नाम शामिल होते हैं और नई तकनीकों की घोषणाएं होती हैं। लेकिन इस बार इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में एक ऐसा क्षण आया जिसने इस परंपरा को तोड़ते हुए फलों के स्वाद को सुर्खियों में ला दिया। न कोई नया मॉडल और न कोई तकनीकी उपलब्धि, बल्कि चर्चा का केंद्र बन गए दिल्ली के ताजे फल, जिनका स्वाद विदेशी प्रतिनिधियों को भी मोह गया।
सारा हूकर ने दिल जीतने वाली तारीफ साझा की
अडैप्टेशन की सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी सारा हूकर ने सम्मेलन के बाद अपने अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किए। उन्होंने ताजे कटे फलों की एक तस्वीर डालते हुए लिखा कि दिल्ली से जाते समय जिस चीज़ को वह सबसे ज़्यादा मिस करेंगी, वह यहां के फल हैं, जिनका स्वाद सच में फलों जैसा होता है। उनके शब्दों में जो सहजता और सच्चाई थी, उसने पाठकों को तुरंत आकर्षित कर लिया। यह कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं बल्कि व्यक्तिगत अनुभव से निकली दिली बात थी, जिसे लोगों ने हाथोंहाथ लिया।
अमेरिका के फलों पर सीधे अनुभव से तुलना
सारा ने यह भी कहा कि जो लोग अमेरिका के बाहर पले-बढ़े हैं, वे अक्सर महसूस करते हैं कि अमेरिका में मिलने वाले फल थोड़े निष्प्राण से लगते हैं, उनमें वह ताजगी और असली स्वाद नहीं होता जो दुनिया के अन्य हिस्सों में मिलता है। दिल्ली में चखे फलों की सुगंध, मिठास और प्राकृतिक रस ने उन्हें यह महसूस कराया कि देसी स्वाद की खासियत कुछ और ही है। उनका यह अनुभव न केवल व्यक्तिगत था बल्कि दुनियाभर के कई लोगों के अनुभव से मेल खाता है।
सोशल मीडिया पर मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया
यह पोस्ट कुछ ही घंटों में वायरल हो गई और हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। कई उपयोगकर्ताओं ने इस बात से सहमति जताई कि भारत में अभी भी देसी बीजों और स्थानीय किस्मों पर जोर दिया जाता है, जिस कारण यहां के फलों में प्राकृतिक स्वाद बना रहता है। लोगों ने कहा कि यह भारतीय कृषि की शक्ति और परंपरा का हिस्सा है, जहां स्वाद और सुगंध को संरक्षित रखने वाली खेती आज भी प्रचलन में है। विदेशी अतिथि की यह तारीफ लोगों के लिए गर्व का कारण बनी।
भारत के फलों की विशिष्टता पर फिर उठी चर्चा
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारत का भोजन, स्वाद और प्राकृतिक उत्पाद सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं। तकनीकी सम्मेलन में फलों का यूं चर्चा का विषय बन जाना इस बात का संकेत है कि भारत की विविधता, संस्कृति और भोजन की गुणवत्ता हर क्षेत्र में अपनी पहचान दर्ज करा रही है। दिल्ली के ताजे फलों ने न केवल स्वाद से बल्कि अपनी प्राकृतिक गुणवत्ता से भी दुनिया को प्रभावित किया।
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