सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगे मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने इन दोनों की जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के सबूतों और रिकॉर्ड से उमर खालिद तथा शरजील इमाम के खिलाफ यूएपीए (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया (प्राइमा फेसी) मामला बनता है। बेंच ने स्पष्ट किया कि दोनों की भूमिका प्लानिंग, लोगों को जुटाने और रणनीतिक निर्देश देने के स्तर पर थी, जो अन्य आरोपियों से गुणात्मक रूप से अलग है। कोर्ट ने यह भी कहा कि, “प्रॉसिक्यूशन की सामग्री उन्हें जमानत पर रिहा करने का कोई आधार नहीं देती।”
सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था
हालांकि, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत मिल गई। ये सभी आरोपी पांच साल से अधिक समय से जेल में हैं। कोर्ट ने जोर दिया कि हर याचिका का अलग-अलग मूल्यांकन जरूरी है, क्योंकि रिकॉर्ड से पता चलता है कि सभी अपील करने वाले अपराध के मामले में एक ही स्थिति में नहीं थे। यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के सितंबर 2025 के आदेश के खिलाफ दायर स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) पर आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
दिल्ली पुलिस का पक्ष: ‘सुनियोजित साजिश थी हिंसा, देश की संप्रभुता पर हमला’
जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि फरवरी 2020 के दंगे कोई अचानक सांप्रदायिक टकराव नहीं थे, बल्कि यह “अच्छी तरह डिजाइन की गई, सुनियोजित और पहले से प्लान की गई” साजिश थी। उन्होंने व्हाट्सएप चैट्स, भाषणों और अन्य सबूतों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि आरोपियों ने समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की कोशिश की और यह देश की संप्रभुता पर हमला था।
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने ट्रायल में देरी के लिए भी आरोपियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि वे सहयोग नहीं कर रहे और आरोप तय करने में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे मामलों में पैटर्न बन गया है कि ट्रायल में देरी करवाई जाए और जमानत मांगी जाए।” गौरतलब हो, फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों में कई लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। मामले की सुनवाई जारी है और यह फैसला यूएपीए के सख्त प्रावधानों के तहत जमानत के मुद्दे पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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