देश की रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाने की दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संगठन ने अत्याधुनिक बख्तरबंद प्लेटफॉर्म का अनावरण किया है, जिन्हें भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। यह पहल आत्मनिर्भरता की दिशा में रक्षा क्षेत्र को नई मजबूती प्रदान करती है।
उन्नत तकनीक से लैस आधुनिक प्लेटफॉर्म
इन प्लेटफॉर्म को वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। इनमें स्वदेशी रूप से विकसित 30 मिमी क्रूलेस बुर्ज लगाया गया है, जिसे 7.62 मिमी पीकेटी गन के साथ एकीकृत किया गया है। साथ ही, इन वाहनों को एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली से भी लैस किया गया है, जिससे इनकी मारक क्षमता और भी बढ़ जाती है।
गतिशीलता और सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार
इन बख्तरबंद वाहनों में उच्च क्षमता वाले इंजन और स्वचालित ट्रांसमिशन का उपयोग किया गया है, जिससे यह कठिन और चुनौतीपूर्ण भू-भाग में भी तेज गति से संचालित हो सकते हैं। सुरक्षा के लिहाज से इन्हें STANAG स्तर 4 और 5 के अनुरूप बैलिस्टिक और विस्फोटक सुरक्षा प्रदान की गई है, जो सैनिकों के लिए उच्च स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
हाइड्रो जेट तकनीक से मिली एम्फीबियस क्षमता
इन प्लेटफॉर्म की एक प्रमुख विशेषता इनकी एम्फीबियस क्षमता है, जो हाइड्रो जेट तकनीक के माध्यम से संभव हुई है। इस तकनीक की मदद से ये वाहन जल बाधाओं को आसानी से पार कर सकते हैं, जिससे युद्ध के दौरान इनकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। यह विशेषता आधुनिक युद्धक्षेत्र में रणनीतिक बढ़त प्रदान करती है।
बहु-भूमिका उपयोग से बढ़ेगी रणनीतिक ताकत
इन बख्तरबंद वाहनों को विभिन्न सैन्य जरूरतों के अनुसार कॉन्फिगर किया जा सकता है, जिससे इनकी बहु-भूमिका क्षमता बढ़ जाती है। यह लचीलापन सेना को अलग-अलग परिस्थितियों में इनका प्रभावी उपयोग करने में सक्षम बनाता है और परिचालन क्षमता को मजबूत करता है।
स्वदेशीकरण को मिलेगी नई गति
इन प्लेटफॉर्म में वर्तमान में लगभग 65 प्रतिशत हिस्से स्वदेशी हैं, जिन्हें भविष्य में बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण प्रक्रिया में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड सहित कई एमएसएमई इकाइयों की भागीदारी रही है। इससे न केवल रक्षा उद्योग को मजबूती मिली है, बल्कि देश के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी गति मिली है।