कोलकाता/बीरभूम: कहते हैं कि राजनीति में धैर्य और निष्ठा का फल मीठा होता है। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में भाजपा (BJP) के जमीनी और वरिष्ठ नेता दूधकुमार मंडल (Dudhkumar Mondal) की कहानी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अस्सी के दशक से भगवा राजनीति से जुड़े रहने, कई उतार-चढ़ाव देखने और लगातार तीन बार चुनावी शिकस्त झेलने के बाद आखिरकार साल 2026 उनके लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। 2026 के विधानसभा चुनाव में मयूरेश्वर सीट से शानदार जीत हासिल करने के बाद दूधकुमार मंडल ने सीधे मंत्री पद की शपथ ली है।
RSS से हुई थी शुरुआत, ग्राम पंचायत से तय किया मंत्री पद तक का सफर
दूधकुमार मंडल के राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक निष्ठावान स्वयंसेवक के रूप में हुई थी। संघ से मिले संस्कारों के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति का रुख किया। साल 1988 में उन्होंने पहली बार मयूरेश्वर ग्राम पंचायत से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 1988 से 1993 तक पंचायत सदस्य रहने के बाद, वे 1993 के पंचायत चुनाव में दोबारा जीते और मयूरेश्वर ग्राम पंचायत के प्रधान (Pradhan) चुने गए। इसके बाद उन्होंने पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर भी संगठन को मजबूत करने का काम किया।
तीन बार हाथ लगी थी निराशा, नहीं हारी हिम्मत
स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने के बाद दूधकुमार मंडल ने बड़े चुनावी दंगल में कदम रखा, लेकिन शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण रही:
2011 विधानसभा चुनाव: पहली बार मयूरेश्वर सीट से भाजपा के टिकट पर लड़े, लेकिन माकपा (CPM) के अशोक राय से हार गए।
2016 विधानसभा चुनाव: इस बार पार्टी ने उन्हें रामपुरहाट सीट से उतारा, लेकिन वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आशीष बनर्जी के सामने चुनाव हार गए।
2019 लोकसभा चुनाव: भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए बीरभूम लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन यहाँ भी जीत उनके हाथ नहीं आई।
इन तमाम हार के बावजूद दूधकुमार मंडल का हौसला नहीं डगमगाया। साल 2015 में जब उन्हें भाजपा का बीरभूम जिला अध्यक्ष बनाया गया, तो उन्होंने जिले के कोने-कोने में जाकर संगठन को बेहद मजबूत किया, जिसका फायदा पार्टी को इस चुनाव में मिला।
जीत के बाद भावुक हुए दूधकुमार, कहा- "शहीदों को समर्पित है यह सुदिन"
साल 2026 के विधानसभा चुनाव में मयूरेश्वर सीट से पहली बार विधायक बनकर विधानसभा पहुँचने वाले दूधकुमार मंडल को पार्टी ने सीधे मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। 1 जून (सोमवार) को राजभवन में मंत्री पद की शपथ लेने के बाद वे पत्रकारों से बात करते हुए काफी भावुक हो गए।
उन्होंने कहा, "आज मुझे उन सभी कार्यकर्ताओं और लोगों की याद आ रही है, जिनकी बदौलत आज भाजपा को यह ऐतिहासिक सफलता मिली है, लेकिन वे इस अच्छे दिन को देखने के लिए हमारे बीच जीवित नहीं रहे। सरकार हमें जो भी जिम्मेदारी देगी, हम उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। पिछले शासनकाल में बंगाल में जो भ्रष्टाचार पनपा था, भाजपा सरकार आने के बाद उसे पूरी तरह साफ कर दिया गया है। हमारा मुख्य लक्ष्य एक पारदर्शी प्रशासन देना और गांवों व शहरों का व्यापक विकास करना है।"