हिंदी फिल्म संगीत की दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम मुंबई में निधन हो गया। वह 89 वर्ष की थीं। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। दशकों तक अपनी मधुर आवाज से करोड़ों श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली सुमन कल्याणपुर के जाने से संगीत प्रेमियों ने एक अमूल्य धरोहर खो दी है।
मुंबई में हुआ निधन, आज होगा अंतिम संस्कार
सुमन कल्याणपुर की करीबी मित्र मंगला खाडिलकर ने बताया कि उन्होंने रविवार रात करीब 8 बजे शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली। अपने अंतिम दिनों में वह अपने ही गाए गीत सुन रही थीं। उनके निधन की खबर मिलते ही संगीत जगत की कई हस्तियों और प्रशंसकों ने शोक व्यक्त किया। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को मुंबई के पवनहंस श्मशान घाट में किया जाएगा। परिवार में उनकी बेटी चारू हैं।
2023 में मिला था पद्म भूषण सम्मान
भारतीय संगीत जगत में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके लंबे और शानदार संगीत करियर की उपलब्धियों का प्रतीक माना गया।
60 और 70 के दशक की सबसे लोकप्रिय आवाजों में थीं शामिल
सुमन कल्याणपुर ने 1960 और 1970 के दशक में हिंदी फिल्म संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई। उस दौर में जब लता मंगेशकर का संगीत जगत पर वर्चस्व था, तब भी सुमन कल्याणपुर ने अपनी विशिष्ट गायकी और मधुर आवाज के दम पर लाखों प्रशंसक बनाए। उनकी गायकी में भावनाओं की गहराई और सुरों की मिठास ने उन्हें संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया था।
आज भी अमर हैं उनके गीत
सुमन कल्याणपुर के कई गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उनके द्वारा गाए गए गीत ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’ और ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ जैसे सदाबहार गीत आज भी संगीत प्रेमियों के पसंदीदा गीतों में शामिल हैं।
कई भारतीय भाषाओं में दी आवाज
हिंदी फिल्मों के अलावा सुमन कल्याणपुर ने मराठी, बंगाली, कन्नड़, असमी और ओड़िया समेत कई भारतीय भाषाओं में भी गीत गाए। उनकी बहुमुखी प्रतिभा और सुरों पर पकड़ ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बनाया।
लता मंगेशकर से तुलना पर रखती थीं अलग राय
अक्सर उनकी आवाज की तुलना महान गायिका लता मंगेशकर से की जाती थी, लेकिन सुमन कल्याणपुर हमेशा इस तुलना को सहजता से खारिज करती थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि लता मंगेशकर उनकी बेहद करीबी मित्र थीं और उनसे मिलना किसी पुरानी सहेली से मिलने जैसा अनुभव होता था।
संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति
सुमन कल्याणपुर का निधन भारतीय संगीत जगत के एक स्वर्णिम अध्याय के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनकी आवाज, उनके गीत और संगीत के प्रति उनका समर्पण हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेगा। भारतीय सिनेमा और संगीत जगत उन्हें हमेशा श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करेगा।