देश के अधिकांश हिस्सों में मार्च के पहले सप्ताह में ही गर्मी का प्रकोप साफ दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार कई राज्यों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया है। राजस्थान के अकोला में तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस मौसम के लिए असामान्य रूप से अधिक माना जा रहा है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी तेज धूप और बढ़ते तापमान ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। दिन के समय गर्म हवाओं और तेज धूप के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार गर्मी सामान्य से पहले दस्तक दे चुकी है।
दिल्ली में टूटा 50 साल का रिकॉर्ड
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मार्च के पहले सप्ताह में ही गर्मी ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शनिवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 35.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले लगभग 50 वर्षों में मार्च के शुरुआती दिनों में दर्ज किए गए तापमान से अधिक है। अचानक बढ़ी इस गर्मी ने लोगों को हैरान कर दिया है। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यदि यही स्थिति बनी रही तो अप्रैल और मई के महीनों में गर्मी और भी तीव्र हो सकती है।
कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट
मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में हीटवेव को लेकर चेतावनी जारी की है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में आज हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा रविवार के लिए राजस्थान के अकोला, महाराष्ट्र के अमरावती और वर्धा तथा हिमाचल प्रदेश के सोलन, मंडी, कुल्लू और कांगड़ा जिलों में भी हीटवेव की चेतावनी दी गई है। इन क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने की संभावना जताई गई है।
मई-जून से पहले ही हीटवेव की स्थिति
आमतौर पर भारत में हीटवेव की स्थिति मई और जून के महीनों में देखने को मिलती है, लेकिन इस बार मार्च में ही इसका असर दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार मैदानी इलाकों में जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच जाता है, तब हीटवेव की स्थिति घोषित की जाती है। इसके अलावा यदि किसी क्षेत्र का तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जाए, तो भी इसे हीटवेव जैसी स्थिति माना जाता है। ऐसी परिस्थितियों में लोगों की सेहत पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से मिल सकती है राहत
हालांकि लगातार बढ़ती गर्मी के बीच कुछ राहत की उम्मीद भी दिखाई दे रही है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के प्रभाव से 8 से 12 मार्च के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है।इस मौसम प्रणाली के प्रभाव से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि मैदानी इलाकों में इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है, लेकिन इससे गर्मी के तीखे असर में थोड़ी राहत मिल सकती है।
मौसम के बदलते संकेत और भविष्य की चिंता
मार्च में ही इतनी तेज गर्मी का अनुभव होना मौसम के बदलते पैटर्न की ओर भी संकेत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण मौसम चक्र में बदलाव दिखाई दे रहा है। यदि आने वाले वर्षों में भी इसी तरह मार्च में गर्मी का प्रकोप बढ़ता रहा, तो इसका असर कृषि, जल संसाधनों और जनस्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। इसलिए मौसम के इन बदलते संकेतों को गंभीरता से समझना और इसके अनुरूप तैयारी करना आवश्यक होता जा रहा है।
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