नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 23 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में आयोग के आंतरिक नोट्स, अलग-अलग विचारों और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत काम करने वाला एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय है। ECI के मुताबिक, किसी भी महत्वपूर्ण फैसले से पहले अधिकारियों और सदस्यों की ओर से अलग-अलग सुझाव, टिप्पणियां या विचार सामने आना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि इन आंतरिक विचारों को अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता, क्योंकि अंतिम फैसले निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
आंतरिक नोट्स और अलग-अलग राय पर आयोग की सफाई
चुनाव आयोग ने कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संस्था में किसी मुद्दे पर अलग-अलग विचार सामने आना असामान्य नहीं है। आयोग के अनुसार, किसी अंतिम निर्णय से पहले अधिकारियों और सदस्यों की ओर से टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। इनका उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और प्रशासनिक जांच-पड़ताल सुनिश्चित करना है।आयोग की यह प्रतिक्रिया उन रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें चुनाव आयुक्तों की ओर से पिछले करीब 10 महीनों में मतदाता सूची, एसआईआर और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े कुछ मुद्दों पर आंतरिक आपत्तियां और टिप्पणियां दर्ज किए जाने की बात कही गई थी। आयोग ने अपने बयान में इन आंतरिक चर्चाओं को संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
आयोग ने कहा- केवल कुछ नोट्स दिखाने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती
ECI ने कहा कि पिछले 10 महीनों के दौरान आयोग ने बड़ी संख्या में मंजूरियां, फैसले, निर्देश और करीब 40 नई पहल की हैं। इनमें मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी प्रक्रिया और देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR भी शामिल है। आयोग के मुताबिक, इन सभी पहलुओं को अलग रखकर केवल कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट्स पर ध्यान देना पूरी प्रक्रिया का सिर्फ एक हिस्सा दिखाता है।आयोग ने यह भी कहा कि पिछले एक साल में लिए गए अंतिम फैसले पूर्ण आयोग के स्तर पर लिए गए और वे कानून के अनुरूप रहे। इस तरह आयोग ने आंतरिक टिप्पणियों और अंतिम निर्णयों के बीच अंतर को स्पष्ट करने की कोशिश की है।
SIR और मतदाता सूची पर क्या कहा?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर भी हाल के दिनों में काफी चर्चा हुई है। आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में SIR को पिछले कुछ समय में की गई चुनावी पहलों का हिस्सा बताया है। ECI की वेबसाइट पर भी 2026 के लिए SIR से जुड़ी मतदाता सूची और मतदाता नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करना और चुनावी व्यवस्था को मजबूत करना उसकी नियमित जिम्मेदारियों का हिस्सा है। हालांकि, SIR की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग पक्षों की चिंताएं और राजनीतिक बहस अलग विषय हैं, जबकि आयोग ने अपने बयान में अपनी प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया पर जोर दिया है।
ECINET और डेटा सुरक्षा पर भी आयोग का जोर
चुनाव आयोग ने डिजिटल चुनावी व्यवस्था को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। आयोग के अनुसार, ECINET एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे मतदाताओं और चुनाव से जुड़े अन्य हितधारकों के लिए कई डिजिटल सेवाओं को एक जगह लाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। ECI के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक ECINET ने 40 से अधिक ऐप और वेबसाइटों को एक प्लेटफॉर्म में समाहित किया है।आयोग ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा सुरक्षा के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू हैं और अनधिकृत छेड़छाड़ को रोकने के लिए तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है।
कई राज्यों में चुनाव कराने का भी दिया हवाला
अपने स्पष्टीकरण में आयोग ने हाल में कराए गए विधानसभा चुनावों का भी उल्लेख किया। ECI के आधिकारिक रिकॉर्ड में 2026 में असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों से संबंधित सामग्री उपलब्ध है।आयोग ने इन चुनावों और अपनी विभिन्न चुनावी पहलों का हवाला देते हुए कहा कि उसकी गतिविधियों को केवल कुछ आंतरिक नोट्स के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। आयोग के अनुसार, चुनावी व्यवस्था में सुधार, मतदाता सूची का पुनरीक्षण, तकनीक का इस्तेमाल और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करना लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है।
आयोग ने क्या स्पष्ट किया?
कुल मिलाकर, 23 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण में चुनाव आयोग ने तीन मुख्य बातें सामने रखीं। पहली, आंतरिक नोट्स और अलग-अलग विचार निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। दूसरी, आयोग के मुताबिक अंतिम फैसले कानून और संवैधानिक व्यवस्था के तहत लिए गए हैं। तीसरी, पिछले महीनों में हुई करीब 40 पहलों और चुनावी सुधारों को भी पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए।