चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर तेज़ हो गया है, जिसमें आयोग ने कई गंभीर अनियमितताओं का हवाला दिया है।
चुनाव आयोग की आपात चेतावनी और बढ़ता संकट
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को चुनौती देने संबंधी याचिका पर पेशियाँ पूरी होने के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को कठोर शब्दों में लिखित चेतावनी भेज दी। आयोग ने स्पष्ट किया कि कई निर्देश अब तक अनुपालन में नहीं लाए गए हैं और इन्हें 9 फरवरी, सोमवार दोपहर 3 बजे तक पूरा करना अनिवार्य होगा। यह समयसीमा दर्शाती है कि आयोग इस मामले को अत्यधिक संवेदनशील और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा मान रहा है।
मुख्य सचिव को भेजे पत्र में उठाए गंभीर सवाल
मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को भेजे पत्र में आयोग सचिव सुजीत कुमार मिश्रा ने विस्तार से बताया कि राज्य सरकार ने आयोग के कई आदेशों का पालन नहीं किया है। पत्र में साफ कहा गया कि आयोग ने जिन कार्रवाइयों को आवश्यक माना था, उनमें से कोई भी निर्धारित समय के भीतर पूरी नहीं की गई। यह स्थिति आयोग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है और इसे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है।
एफआईआर, निलंबन और ट्रांसफर रद्द करने जैसे मामलों पर आपत्ति
पत्र में जिन गैर-अनुपालनों का उल्लेख है, उनमें कुछ अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज न करने, दो अधिकारियों को निलंबित किए जाने के बावजूद उनकी स्थिति स्पष्ट न होने, तीन प्रेक्षकों के स्थानांतरण को रद्द करने और कुछ रिटर्निंग ऑफिसरों की नियुक्तियों में अनियमितता जैसे मुद्दे प्रमुख थे। चुनाव आयोग ने इन्हें संवेदनशील विषय बताते हुए राज्य सरकार से तुरंत कार्रवाई की अपेक्षा की है और देरी को प्रक्रिया के विरुद्ध बताया है।
बशीरहाट की घटना और सुप्रीम कोर्ट आदेश का उल्लंघन
सबसे गंभीर मामला बशीरहाट की एईआरओ एवं बीडीओ सुमित्रा प्रतीम प्रधान के निलंबन से जुड़ा पाया गया। आयोग के अनुसार, उन्होंने अपने स्तर पर एक अतिरिक्त एईआरओ को सुनवाई के लिए तैनात कर दिया था, जो न केवल मनमाना था बल्कि वैधानिक प्रावधानों के सीधे विरुद्ध था। चुनाव आयोग ने इस मामले में 25 जनवरी के अपने पत्र के 48 घंटे के भीतर कार्रवाई की मांग की थी, परंतु उसे नजरअंदाज कर दिया गया। आयोग ने इसे 21 सितंबर 2000 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश और 31 मई 2023 को जारी आयोगीय निर्देश का उल्लंघन बताया।
ममता सरकार और ECI के बीच बढ़ता तनाव
यह पूरा घटनाक्रम उस समय और अधिक गहराता दिखा जब ममता बनर्जी ने स्वयं सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर प्रक्रिया पर प्रश्न उठाते हुए याचिका दायर की। याचिका के ठीक बाद आयोग का यह विस्तृत पत्र सामने आना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। चुनाव आयोग का मानना है कि चुनावी पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए उसके आदेशों का सख्ती से पालन किया जाना आवश्यक है, जबकि राज्य सरकार इसे प्रशासनिक अधिकारों में अनावश्यक दखल के रूप में देख रही है।
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