विक्रम विश्वविद्यालय में रामायण युग पर हो रहे रिसर्च पर एक बड़ी तैयारी की जा रही है। दरअसल दो वर्ष पहले राम सेतु से बने पत्थरों के परीक्षण कर उन्हें बनाने के लिए विक्रम विश्वविद्यालय ने एक एमओयू साइन किया था। इसके तहत विक्रम विश्वविद्यालय की चयनित रिसर्च टीम साउथ के धनुष कोड़ी जाकर रिसर्च करेगी। इस प्रोजेक्ट के बारे में उज्जैन विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अखिलेश पांडे ने बताया कि रामसेतु में उपयोग किए गए राम नाम लिखे पत्थरों के रिसर्च के लिए विक्रम विश्वविद्यालय की चयनित रिसर्च टीम साउथ के धनुष कोड़ी जाकर रिसर्च करेगी। दो वर्ष पहले विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन ने उज्जैन के शासकीय इंजीनियरिंग कालेज के साथ मेमोरेन्डम ऑफ अंडरस्टेडिंग (एमओयू) साइन किया था।
एमओयू के अनुसार विक्रम विश्वविद्यालय के स्कूल आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी (एसओइटी) के विद्यार्थी गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कालेज की लैब में प्रोजक्ट कर सकेंगे। दोनों संस्थान के विद्यार्थी रामसेतु निर्माण में उपयोग किए तैरने वाले पत्थरों पर शोध कर समतुल्य मटेरियल का निर्माण करेंगे।
राम नाम लिखे पत्थरों पर शोध के बाद तैयार कृत्रिम पत्थर से बिल्डिंग और पुल-पुलिया बनाए जा सकेंगे। भूकंप वाले क्षेत्रों में घरों के निर्माण में काम आएगा
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