कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने अपने सरकारी नंबर से जुड़े दो व्हाट्सऐप ग्रुप छोड़ दिए हैं। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि, फिरहाद हाकिम ने साफ किया है कि वह अब मंत्री पद पर नहीं हैं, इसलिए सरकारी नंबर हटाना एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
इस घटनाक्रम ने उस समय और ज्यादा ध्यान खींचा, जब उनकी बेटी प्रियदर्शिनी हकीम ने सोशल मीडिया पर महाभारत का उदाहरण देते हुए ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी की थी। इसके बाद से ही राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
फिरहाद हाकिम ने कहा कि उन्होंने केवल सरकारी नंबर वाले ग्रुप छोड़े हैं, जबकि उनका निजी नंबर अब भी उन ग्रुप्स में मौजूद है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग इसे पार्टी के हालिया खराब प्रदर्शन और अंदरूनी असंतोष से जोड़कर देख रहा है।
ममता के करीबी माने जाते हैं फिरहाद
फिरहाद हकीम लंबे समय से ममता बनर्जी के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं। चुनावी रणनीति से लेकर संगठन तक, कई अहम जिम्मेदारियां उनके पास रही हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में भी भवानीपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी।
बढ़ सकती है अंदरूनी चर्चा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस समय पार्टी के कई नेता अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर बयान दे रहे हैं, उस समय फिरहाद हाकिम का यह कदम टीएमसी के भीतर नए समीकरणों की चर्चा को और हवा दे सकता है।