देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए फसल वर्ष 2024-25 बेहद अहम साबित हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ रिकॉर्ड 35.77 करोड़ टन पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि न सिर्फ किसानों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि केंद्र सरकार की कृषि नीतियों, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और प्रभावी खरीद व्यवस्था की भी बड़ी सफलता मानी जा रही है।
पिछले वर्ष की तुलना में कितना बढ़ा उत्पादन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फसल वर्ष 2023-24 (जुलाई-जून) में देश का खाद्यान्न उत्पादन 33.23 करोड़ टन था। इसके मुकाबले 2024-25 में उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि बदलते मौसम, बेहतर बीज, तकनीकी सहायता और सरकारी प्रोत्साहन का संयुक्त परिणाम मानी जा रही है।
गेहूं और चावल ने बनाया नया रिकॉर्ड
अंतिम अनुमान के अनुसार, गेहूं का उत्पादन 2024-25 में बढ़कर रिकॉर्ड 11.79 करोड़ टन हो गया, जो पिछले वर्ष 11.33 करोड़ टन था। वहीं चावल उत्पादन में भी बड़ी छलांग देखने को मिली और यह बढ़कर 15.02 करोड़ टन पर पहुंच गया, जबकि 2023-24 में यह 13.78 करोड़ टन था। ये दोनों फसलें देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ मानी जाती हैं।
मोटे अनाज और दालों में भी मजबूत बढ़त
मोटे अनाज (श्री अन्न) के उत्पादन में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। इसका उत्पादन 5.69 करोड़ टन से बढ़कर 6.39 करोड़ टन हो गया। दालों के क्षेत्र में भी सुधार दर्ज किया गया और उत्पादन 2.42 करोड़ टन से बढ़कर 2.57 करोड़ टन पर पहुंच गया, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम है।
तिलहन और नकदी फसलों का प्रदर्शन
गैर-खाद्यान्न फसलों की बात करें तो तिलहन उत्पादन 3.97 करोड़ टन से बढ़कर 4.30 करोड़ टन हो गया। नकदी फसलों में गन्ने का उत्पादन 45.46 करोड़ टन रहा, जो पिछले वर्ष के लगभग बराबर है। हालांकि, कपास उत्पादन में गिरावट देखने को मिली और यह घटकर 2.97 करोड़ गांठ रह गया, जबकि 2023-24 में यह 3.25 करोड़ गांठ था।
10 वर्षों में कृषि उत्पादन में बड़ा बदलाव
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत के खाद्यान्न उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2015-16 में जहां कुल उत्पादन 25.15 करोड़ टन था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 35.77 करोड़ टन हो गया है। यह बदलाव कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों का संकेत देता है।
सरकारी नीतियों और MSP की अहम भूमिका
कृषि मंत्री ने रिकॉर्ड उत्पादन का श्रेय किसानों के प्रयासों के साथ-साथ उच्च MSP, समय पर खरीद और किसान हितैषी नीतियों को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।
भविष्य की रणनीति और दलहन में आत्मनिर्भरता
अंतिम अनुमान जारी करने के बाद मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भविष्य की कृषि रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने भरोसा जताया कि ‘दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन’ आने वाले वर्षों में दालों के उत्पादन को नई गति देगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।
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