नई दिल्ली. सोने और चांदी की कीमतों में अक्टूबर के महीने में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है। बीते महीने चांदी का दाम 39 हजार रुपये से अधिक गिर गया। सोना भी पहले की तुलना में काफी सस्ता हो चुका है। धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे निवेशकों के लिए यह सकारात्मक संकेत है। बाजार में गिरावट ने खरीदारी का माहौल बनाया है। लंबी अवधि के निवेशकों की नजर इन दामों पर है। त्योहारी सीजन से पहले यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सोने की कीमतों में कमी
इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 को 24 कैरेट गोल्ड का रेट 148687 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 30 अक्टूबर की शाम को यह घटकर 140054 रुपये रह गया। यानी एक महीने में सोने के दाम में 8663 रुपये की गिरावट आई। गिरावट की यह रफ्तार निवेशकों के लिए राहत लेकर आई है। त्योहारी मांग से पहले कीमतों में नरमी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषक इस रुख पर नजर रखे हुए हैं।
चांदी के दामों में बड़ी गिरावट
चांदी के मामले में गिरावट और भी तेज रही। पिछले महीने की शुरुआत में चांदी का रेट 220829 रुपये प्रति किलोग्राम था। शुक्रवार की शाम तक यह घटकर 181344 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। इस तरह बीते महीने चांदी के दाम में 39485 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी गिरावट हुई। औद्योगिक मांग और वैश्विक संकेतों का असर दिखा। चांदी में आई गिरावट ने इसे अपेक्षाकृत सस्ता बना दिया है। निवेश और जूलरी दोनों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है।
आज के ताजा रेट
1 नवंबर को दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 139030 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। मुंबई में 138880 रुपये चेन्नई में भी 138880 रुपये जयपुर में 139030 रुपये और लखनऊ में 139030 रुपये प्रति 10 ग्राम रेट दर्ज किया गया। विभिन्न शहरों में कीमतों में मामूली अंतर दिखा। स्थानीय मांग और कर संरचना का असर रहता है। ताजा रेट त्योहारी खरीदारी के लिए आधार बनेंगे। बाजार में स्थिरता की उम्मीद जताई जा रही है।
कीमतों में गिरावट की वजह
एक्सपर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला बढ़ता रिटर्न सोने की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह रहा। जनवरी 2026 के आखिर में जब सोना रिकॉर्ड स्तर पर था तब अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर रिटर्न करीब 4.24 प्रतिशत था। 5 अक्टूबर तक यह बढ़कर 5.31 प्रतिशत पहुंच गया। महंगाई को समायोजित करने के बाद 10 साल के बॉन्ड का रिटर्न 2.92 प्रतिशत हो गया जो 2008 के स्तर के करीब था। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से गोल्ड जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बना।
क्या खरीदना सही रहेगा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में गिरावट के बाद सोना निवेश के लिए पहले से अधिक आकर्षक हो गया है। गिरावट का दबाव अब कम होता दिख रहा है। लंबे समय के नजरिए से निवेश करने वाले बड़े खरीदारों ने खरीद जारी रखी है। एक साथ बड़ा निवेश करने के बजाय किस्तों में निवेश बेहतर विकल्प हो सकता है। धनतेरस और दिवाली जैसे मौकों पर पारंपरिक खरीदारी भी जारी रहती है। व्यक्तिगत जरूरत और जोखिम क्षमता के अनुसार फैसला लेना उचित रहेगा।