नई दिल्ली- देश में E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर लगातार बहस जारी है। कुछ लोगों द्वारा इस ईंधन के माइलेज, इंजन की क्षमता, बीमा और वाहन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इन सभी आशंकाओं पर विस्तार से सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इथेनॉल कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में वर्षों से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां तक कि हाई-परफॉर्मेंस रेसिंग कारों में भी इथेनॉल का उपयोग होता है, क्योंकि यह इंजन की कार्यक्षमता बढ़ाने और बेहतर एक्सेलेरेशन देने में मदद करता है। मंत्री ने कहा कि सरकार ने इथेनॉल मिश्रण की नीति किसी जल्दबाजी में नहीं बनाई है। इस पर लंबे समय तक वैज्ञानिक संस्थानों, ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद ही देश में E20 ईंधन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। सरकार का उद्देश्य केवल पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना नहीं, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना और विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है।
'रेसिंग कारों में भी होता है इथेनॉल का इस्तेमाल, परफॉर्मेंस बेहतर होती है'
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि इथेनॉल इंजन के लिए नुकसानदायक है, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में कई रेसिंग कारें इथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल करती हैं। इससे इंजन की नॉकिंग कम होती है और वाहन का एक्सेलेरेशन बेहतर होता है। यही वजह है कि विकसित देशों में भी बायोफ्यूल को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में भी वैज्ञानिक परीक्षणों और तकनीकी मानकों के आधार पर ही इस ईंधन को मंजूरी दी गई है। इसलिए लोगों को अफवाहों पर विश्वास करने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
माइलेज में मामूली कमी हो सकती है, लेकिन इसके कई कारण होते हैं
केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में हल्की कमी देखने को मिल सकती है, लेकिन इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी वाहन का माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता। सड़क की स्थिति, ट्रैफिक, वाहन की सर्विसिंग, टायर प्रेशर, ड्राइविंग स्टाइल और इंजन की स्थिति जैसे कई अन्य कारक भी माइलेज को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कहीं माइलेज में थोड़ी कमी आती भी है तो वह बहुत मामूली होती है और उसके बदले पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण में कमी और ऊर्जा सुरक्षा जैसे बड़े फायदे देश को मिलते हैं। इसलिए इस छोटे बदलाव को व्यापक राष्ट्रीय हित के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
बीमा कवर खत्म होने की खबरों को बताया पूरी तरह झूठ
E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि ऐसे ईंधन का इस्तेमाल करने वाले वाहनों का बीमा अमान्य हो सकता है। इस पर हरदीप सिंह पुरी ने साफ कहा कि यह पूरी तरह भ्रामक और निराधार दावा है। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियां पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहनों के बीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी झूठी बातें फैलाकर किसका फायदा किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि लोगों को अपुष्ट जानकारी पर भरोसा नहीं करना चाहिए और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी को ही सही मानना चाहिए।
20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण पर क्या है सरकार की योजना?
मंत्री ने बताया कि फिलहाल देश में E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल लागू किया जा रहा है। भविष्य में यदि इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने पर विचार किया जाता है तो उससे पहले सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा मूल्यांकन और ऑटोमोबाइल कंपनियों की सहमति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले वैज्ञानिक परीक्षणों और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करती है। इसलिए फिलहाल E20 के बाद अगले चरण को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं की जाएगी।
भारत में सभी तकनीकों के लिए है पर्याप्त जगह
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजारों में से एक है। ऐसे में यहां केवल एक तकनीक पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन, सीएनजी वाहन, हाइब्रिड वाहन और बायोफ्यूल आधारित वाहन सभी का भविष्य भारत में उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी एक तकनीक को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प उपलब्ध कराना और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल-डीजल पर भी दिया बड़ा संकेत
हरदीप सिंह पुरी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि तेल विपणन कंपनियां अभी उस कच्चे तेल का उपयोग कर रही हैं जिसे लगभग दो महीने पहले अधिक कीमतों पर खरीदा गया था। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने का असर तुरंत खुदरा ईंधन की कीमतों पर दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक स्थिर और कम बनी रहती हैं, तभी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल इस बारे में कोई त्वरित फैसला संभव नहीं है।