नई दिल्ली। अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में दान और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजनीति तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने इस मामले की जानकारी कई बार दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने प्रधानमंत्री की तुलना 'धृतराष्ट्र' से करते हुए आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए पूरे मामले को दबाया गया।
'बड़े लोगों को बचाया जा रहा है'
प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि वह यह दावा नहीं कर सकते कि कथित गड़बड़ी का पैसा प्रधानमंत्री तक पहुंचा, लेकिन घटनाक्रम यह संकेत देता है कि मामले को दबाने की कोशिश हुई। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की पहल पर हुआ था और ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग प्रधानमंत्री के करीबी बताए जाते हैं।
जमीन खरीद पर उठाए सवाल
केजरीवाल ने ट्रस्ट की जमीन खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि एक जमीन पहले करीब 2 करोड़ रुपये में खरीदी गई और कुछ ही समय बाद उसी जमीन को ट्रस्ट ने 18 करोड़ रुपये में खरीद लिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 9 करोड़ रुपये की जमीन 55 करोड़ रुपये में खरीदी गई। उनके मुताबिक कुल 14 करोड़ रुपये की जमीन करीब 95 करोड़ रुपये में खरीदी गई और इससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक हैं।
SIT पर भी साधा निशाना
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़े इंजीनियरों ने 40 प्रतिशत तक कमीशन मांगे जाने की बात कही थी। उन्होंने दावा किया कि CCTV में कई बार चोरी की घटनाएं रिकॉर्ड हुईं, लेकिन बाद में कई महीनों की फुटेज हटा दी गई। उन्होंने कहा कि जब मामला बढ़ गया, तब लोगों को गुमराह करने के लिए SIT का गठन किया गया।
योगी सरकार पर भी उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए केजरीवाल ने कहा कि यदि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा करती है, तो इस मामले में अब तक कठोर कदम क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
मामले पर क्या है स्थिति?
यह ध्यान देना जरूरी है कि केजरीवाल द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक बयान हैं। संबंधित आरोपों पर जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।