हैदराबाद/नई दिल्ली: हैदराबाद से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर धोखे से शादी करने, जबरन धर्म परिवर्तन कराने, यौन शोषण और आर्थिक ठगी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता के मुताबिक, यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दी गई।
झूठी पहचान बनाकर किया संपर्क
पीड़िता ने बताया कि मई 2021 में उसकी मुलाकात आरोपी से हुई, जिसने अपना नाम नवदुर्गा बताया और खुद को धर्म परिवर्तन कर हिंदू बनने का दावा किया। आरोपी ने दुकान किराए पर लेने के बहाने उससे संपर्क किया और धीरे-धीरे भरोसा जीत लिया।
ब्लैकमेल कर शादी के लिए किया मजबूर
महिला का आरोप है कि शादी से पहले आरोपी ने उसे नशीला पदार्थ देकर बेहोशी की हालत में दुष्कर्म किया और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींच लीं। इन तस्वीरों के जरिए उसे ब्लैकमेल कर 28 जुलाई 2025 को शादी के लिए मजबूर किया गया।
शादी के बाद जबरन धर्म परिवर्तन
शादी के बाद महिला को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया गया और उसका नाम बदलकर नजीरा रख दिया गया। पीड़िता का आरोप है कि इस दौरान उसके साथ लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया गया।
आर्थिक शोषण और संपत्ति हड़पने का आरोप
महिला ने बताया कि आरोपी और उसके परिवार ने उससे करीब 16.7 लाख रुपये लिए और उसके नाम पर लोन भी लिया। इतना ही नहीं, उसकी जमीन को भी जबरन बेच दिया गया, जिससे उसे 25 से 30 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ।
जबरन मांस खिलाने और गर्भपात कराने का आरोप
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि उसे जबरन बीफ खाने के लिए मजबूर किया गया, जबकि वह शाकाहारी थी। इसके अलावा, उसे जबरदस्ती गर्भपात कराने के लिए भी मजबूर किया गया। महिला का कहना है कि उसे बार-बार नशीला पदार्थ देकर शोषण किया गया और इसमें परिवार के कई सदस्य शामिल थे।
पुलिस पर लापरवाही का आरोप
महिला ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने केवल गुमशुदगी का मामला दर्ज किया और उचित कार्रवाई नहीं की।
धर्म परिवर्तन और कानूनी स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
गौरतलब है कि इसी साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया था कि अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोगों को ही मिलता है। यदि कोई व्यक्ति अन्य धर्म जैसे इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाता है, तो उसे SC वर्ग के तहत मिलने वाले संवैधानिक लाभ नहीं मिलेंगे। यह मामला न केवल महिला सुरक्षा बल्कि कानून व्यवस्था और सामाजिक विश्वास पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।