केंद्र सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट ने खाद्य सुरक्षा की गंभीर स्थिति उजागर कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, जांचे गए 1.70 लाख सैंपल में से 17.6% मानकों पर खरे नहीं उतरे।
डेयरी सेक्टर में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक स्थिति डेयरी सेक्टर की बताई गई है। करीब 38% दूध के सैंपल फेल पाए गए, जिससे आम लोगों की सेहत पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
ग्लोबल इंडेक्स में भारत पीछे
ग्लोबल फूड सिक्योरिटी इंडेक्स 2022 में भारत 80वें स्थान पर है, जबकि अमेरिका और कनाडा शीर्ष स्थान पर हैं। इसका मुख्य कारण भारत में खुले में खाद्य पदार्थों की बिक्री और कमजोर निगरानी व्यवस्था है।
खुली बिक्री बनी बड़ी चुनौती
भारत में आज भी करीब 70% दूध और 65% मसाले खुले में बेचे जाते हैं। इसके विपरीत, विकसित देशों में अधिकांश उत्पाद पैकेजिंग में होते हैं, जिससे उनकी ट्रैकिंग और गुणवत्ता नियंत्रण आसान हो जाता है।
सिस्टम में खामियां और स्टाफ की कमी
खाद्य सुरक्षा तंत्र कई चुनौतियों से जूझ रहा है:
डेजिग्नेटेड ऑफिसर के 16% और फूड सेफ्टी ऑफिसर के 35% पद खाली हैं
केवल 2,623 एफएसओ पर 58 लाख फर्मों की निगरानी का जिम्मा
एक अधिकारी पर औसतन 2,200 फर्में, जबकि कनाडा में यह संख्या 50 है
लैब की कमी भी बड़ी समस्या
देश में केवल 252 अधिसूचित फूड टेस्टिंग लैब हैं, यानी 62 लाख लोगों पर एक लैब उपलब्ध है। इससे सैंपल की जांच और रिपोर्टिंग में देरी होती है।
सेल्फ-डिक्लेरेशन का खतरा
भारत में कई कंपनियां लैब रिपोर्ट के बिना ही ‘सेल्फ-डिक्लेरेशन’ के आधार पर उत्पाद बाजार में उतार देती हैं। कई बार अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही उत्पाद बिक भी जाते हैं, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत खतरे में पड़ जाती है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सख्त निगरानी, बेहतर संसाधन और पारदर्शी व्यवस्था की सख्त जरूरत है, ताकि मिलावट पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।