फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान की है। दोनों नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों, आर्थिक सहयोग और सामरिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। इस मुलाकात को भारत और फ्रांस के बीच विकसित हो रहे विश्वास और दीर्घकालिक सहयोग का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहे, बल्कि रक्षा, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी लगातार मजबूत हुए हैं।
पांच वर्षों में व्यापार दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
बैठक के दौरान दोनों देशों ने मौजूदा लगभग 16 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को अगले पांच वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया। यह लक्ष्य केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरे आर्थिक एकीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। भारत और फ्रांस का मानना है कि निवेश, विनिर्माण, उच्च प्रौद्योगिकी और सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाकर व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से भी इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को मिलेगा नया विस्तार
स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की वैश्विक आवश्यकता को देखते हुए दोनों देशों ने असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई। ऊर्जा सुरक्षा आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुकी है और इस संदर्भ में परमाणु ऊर्जा को दीर्घकालिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है। भारत और फ्रांस पहले से ही इस क्षेत्र में साझेदार रहे हैं, लेकिन अब इसे नई तकनीकों, अनुसंधान और परियोजनाओं के माध्यम से और व्यापक बनाने की योजना बनाई जा रही है। इससे भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों को बल मिल सकता है।
नवाचार और स्टार्टअप जगत को मिलेगा वैश्विक मंच
दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया, जिसमें भारत, फ्रांस और अन्य देशों के नवाचार आधारित उद्यमों, निवेशकों और अनुसंधान संस्थानों को एक मंच पर लाया गया। इस आयोजन का उद्देश्य उभरती तकनीकों और गहन तकनीकी स्टार्टअप्स को वैश्विक अवसरों से जोड़ना है। भारतीय नवाचार क्षमता को अंतरराष्ट्रीय निवेश और तकनीकी सहयोग से जोड़ने का यह प्रयास भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भारतीय युवाओं और उद्यमियों को नए अवसर प्राप्त होने की संभावना है।
रक्षा, अंतरिक्ष और सुरक्षा सहयोग पर विशेष जोर
भारत और फ्रांस ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को अपनी रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख स्तंभ बताया। दोनों देशों ने आतंकवाद विरोधी प्रयासों, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच समन्वय को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक रूप धारण कर सकता है।
आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला पर नया संवाद
बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों और उन्नत प्रौद्योगिकियों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने के लिए एक नए आर्थिक सुरक्षा संवाद की शुरुआत पर भी सहमति बनी। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के बीच यह पहल दोनों देशों को रणनीतिक रूप से अधिक सक्षम बना सकती है। इसके अलावा ‘इनोवेशन रोडमैप 2030’ को अपनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिससे अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और औद्योगिक सहयोग को दीर्घकालिक आधार मिलेगा।
वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण
वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया और यूक्रेन जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने वैश्विक शांति, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत और फ्रांस का मानना है कि बहुपक्षीय सहयोग और संवाद के माध्यम से ही विश्व की जटिल चुनौतियों का समाधान संभव है। यही कारण है कि दोनों देश केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक मंचों पर भी एक-दूसरे के महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में उभर रहे हैं।