पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े युद्ध के बाद उत्पन्न अस्थिरता ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और हवाई यातायात को प्रभावित कर दिया था। कई देशों ने अस्थायी रूप से अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था, जिसके कारण हजारों भारतीय नागरिक वहां फंस गए थे। जैसे ही क्षेत्र में हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुला, भारत सरकार ने तुरंत राहत और निकासी अभियान को गति दी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने शनिवार रात जारी एक बयान में बताया कि पिछले कुछ दिनों में 52 हजार से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रूप से स्वदेश लाया जा चुका है। यह अभियान भारत की त्वरित कूटनीतिक और प्रशासनिक क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।
‘मिशन स्वदेश’ के तहत तेज़ निकासी अभियान
भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष निकासी अभियान को अनौपचारिक रूप से “मिशन स्वदेश” के रूप में देखा जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार एक से सात मार्च के बीच ही 32,107 भारतीय नागरिकों ने भारतीय एयरलाइंस के माध्यम से यात्रा करके अपने देश वापसी की है। युद्ध की स्थिति के बावजूद भारतीय और विदेशी एयरलाइंस द्वारा सीमित वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन शुरू होते ही भारत ने अपने नागरिकों को प्राथमिकता देते हुए उनके सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की। आने वाले दिनों में और अतिरिक्त उड़ानों की योजना बनाई जा रही है ताकि वहां फंसे बाकी नागरिकों को भी जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जा सके।
विदेश मंत्रालय की लगातार निगरानी
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है। मंत्रालय के अनुसार क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावास और मिशन लगातार भारतीय नागरिकों के संपर्क में हैं और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान कर रहे हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि वहां मौजूद भारतीयों को नियमित रूप से एडवाइजरी जारी की जा रही है ताकि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षित रह सकें। इस संकट के दौरान भारतीय मिशनों की सक्रिय भूमिका भारतीय नागरिकों के लिए राहत का बड़ा आधार बनी हुई है।
सहायता के लिए 24×7 हेल्पलाइन व्यवस्था
सरकार ने संकटग्रस्त क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सहायता के लिए 24×7 हेल्पलाइन सेवाएं भी स्थापित की हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार कुल 2437 हेल्पलाइन नंबर सक्रिय किए गए हैं, जिनके माध्यम से भारतीय नागरिक सहायता, जानकारी और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। इन हेल्पलाइन के माध्यम से हजारों लोगों को तत्काल सहायता प्रदान की गई है। यह व्यवस्था इस बात का संकेत है कि सरकार संकट की घड़ी में अपने नागरिकों के साथ खड़ी है और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क
भारत सरकार केवल निकासी अभियान तक सीमित नहीं है बल्कि इस पूरे संकट के दौरान संबंधित देशों की सरकारों के साथ भी लगातार संपर्क में है। कूटनीतिक स्तर पर समन्वय बनाए रखते हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस क्षेत्र में मौजूद हर जरूरतमंद भारतीय की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।
भारतीय नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील
विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें और भारतीय मिशनों द्वारा जारी सलाहों को गंभीरता से लें। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है, इसलिए नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत भारतीय दूतावास या हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
संकट के बीच भारत की वैश्विक जिम्मेदारी
पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारत द्वारा चलाया जा रहा यह निकासी अभियान न केवल अपने नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी का उदाहरण है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक क्षमता और मानवीय दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। इस अभियान ने एक बार फिर यह साबित किया है कि संकट की घड़ी में भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और उन्हें सुरक्षित घर लाने के लिए हर संभव प्रयास करता है।
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