अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की प्रतिष्ठित 'वेज़ एंड मीन्स समिति' के नेतृत्व और सदस्यों के साथ विशेष गोलमेज बैठक में भाग लिया। इस बैठक में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और अधिक व्यापक, संतुलित तथा दीर्घकालिक बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच व्यापारिक सहयोग को नई गति देने तथा निवेश और औद्योगिक भागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।
अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बढ़े कदम
यह बैठक ऐसे समय आयोजित हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगातार वार्ताएं चल रही हैं। दोनों देश लंबे समय से ऐसे व्यापारिक ढांचे पर कार्य कर रहे हैं, जिससे वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक संपन्न होता है तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई ऊर्जा आएगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका भी अधिक मजबूत होगी।
अमेरिकी कांग्रेस की अहम समिति से संवाद के मायने
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की 'वेज़ एंड मीन्स समिति' को वहां की सबसे पुरानी और प्रभावशाली संसदीय समितियों में गिना जाता है। कर नीति, व्यापार और राजस्व से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विधायी विषय इसी समिति के माध्यम से आगे बढ़ते हैं। बैठक में समिति के अध्यक्ष जेसन स्मिथ तथा वरिष्ठ सदस्य रिचर्ड नील सहित कई प्रभावशाली सांसद उपस्थित रहे। इस स्तर पर हुआ संवाद इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर भी व्यापक समर्थन प्राप्त है।
प्रतिस्पर्धी शुल्क व्यवस्था पर भारत का स्पष्ट रुख
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में संकेत दिया है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर या कम से कम समान शुल्क लाभ प्राप्त हो। सरकार का मानना है कि भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और विनिर्माण क्षेत्र के हितों से किसी प्रकार का समझौता किए बिना ही व्यापारिक समझौते को आगे बढ़ाया जाएगा।
व्यापार से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे दोनों देश
भारत और अमेरिका के संबंध अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहे हैं। रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, डिजिटल नवाचार, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। व्यापार समझौते को इसी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। यदि वार्ताएं सफल रहती हैं तो इससे निवेश, रोजगार, निर्यात और तकनीकी सहयोग के नए अवसर खुलेंगे तथा दोनों लोकतांत्रिक देशों के आर्थिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका को मिलेगा नया बल
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक समझौता वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करेगा। विश्व की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग न केवल द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा, बल्कि वैश्विक निवेशकों का विश्वास भी बढ़ाएगा। ऐसे समय में जब विश्व नई आर्थिक चुनौतियों और आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्गठन से गुजर रहा है, भारत और अमेरिका की यह साझेदारी भविष्य की वैश्विक आर्थिक संरचना को भी महत्वपूर्ण दिशा दे सकती है।