नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा NEET पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के ऐलान के बाद कांग्रेस की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों के लगातार विरोध और विपक्ष के दबाव के कारण सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री संसद में इस मुद्दे पर बहस करने से बच रहे हैं और सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रख रहे हैं।
'संसद में बहस का साहस नहीं'
जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में संसद में आकर छात्रों के मुद्दे पर खुलकर चर्चा करने का साहस नहीं है। उनका कहना था कि पूर्व प्रधानमंत्रियों ने राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सदन में जवाब दिया, लेकिन मौजूदा प्रधानमंत्री ऐसा नहीं कर रहे हैं।
'सरकार की बेचैनी दिखाता है पोस्ट'
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री का सोशल मीडिया पोस्ट यह दर्शाता है कि सरकार छात्रों के आंदोलन और बढ़ते जनदबाव से चिंतित है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में परीक्षा प्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है और सरकार इस संकट को रोकने में नाकाम रही है।
PM मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
राहुल गांधी ने भी सरकार को घेरा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है और पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
राहुल गांधी ने छात्रों की तीन प्रमुख मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।छात्रों पर हुई कथित हिंसा के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
छात्र आंदोलन के बीच सियासत तेज
NEET पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर केंद्र सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित कार्रवाई का भरोसा दे रही है, वहीं विपक्ष इसे छात्रों के दबाव का परिणाम बता रहा है।