भगवान शिव के परम धाम माने जाने वाले कैलास मानसरोवर की यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत और उत्साह भरी खबर सामने आई है। लंबे इंतजार के बाद वर्ष 2026 की कैलास मानसरोवर यात्रा जून माह से शुरू होने जा रही है, जो अगस्त तक संचालित होगी। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्गों को पार कर भगवान शिव के दिव्य धाम के दर्शन के लिए रवाना होंगे।
लिपुलेख और नाथुला मार्ग से जाएंगे श्रद्धालु
इस वर्ष यात्रा दो प्रमुख मार्गों से संचालित की जाएगी। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले स्थित लिपुलेख दर्रे के रास्ते कुमाऊं मार्ग से दस दलों में लगभग पांच सौ यात्री कैलास मानसरोवर के लिए रवाना होंगे। वहीं सिक्किम के नाथुला दर्रे से भी करीब पांच सौ श्रद्धालुओं को यात्रा का अवसर मिलेगा। दोनों मार्गों को रणनीतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया हुई शुरू
विदेश मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गई है कि यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया 29 अप्रैल से शुरू हो चुकी है। इच्छुक श्रद्धालु निर्धारित वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यात्रियों का चयन कंप्यूटर आधारित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें लिंग संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यात्रा जून के पहले या दूसरे सप्ताह से प्रारंभ हो सकती है।
यात्रा खर्च पर जल्द होगा अंतिम फैसला
फिलहाल प्रति यात्री होने वाले खर्च को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद शुल्क और अन्य व्यवस्थाओं की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। विदेश मंत्रालय ने संबंधित एजेंसियों को पिछली यात्राओं में सामने आई कमियों को दूर करने और सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए हैं।
1981 से यात्रा का संचालन कर रहा है केएमवीएन
कुमाऊं मंडल विकास निगम वर्ष 1981 से कैलास मानसरोवर यात्रा के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2025 तक लगभग पांच सौ दलों में 18 हजार से अधिक श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बन चुके हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई के बावजूद हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा के लिए उत्साह दिखाते हैं।
आस्था और अध्यात्म का दिव्य केंद्र है कैलास
तिब्बत के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित कैलास पर्वत समुद्र तल से लगभग 21,778 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार यही भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य निवास है। वहीं मानसरोवर झील को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां स्नान और दर्शन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।
कोविड के बाद फिर लौटी यात्रा की रौनक
कोविड महामारी के कारण वर्ष 2019 के बाद कैलास मानसरोवर यात्रा लंबे समय तक बंद रही थी। वर्ष 2025 में इसे दोबारा शुरू किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में नया उत्साह देखने को मिला। खास बात यह रही कि पहली बार टनकपुर मार्ग से भी यात्रा का संचालन किया गया था। अब 2026 की यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो चुकी हैं और प्रशासन श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है।
आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा नया बल
विशेषज्ञों का मानना है कि कैलास मानसरोवर यात्रा के पुनः नियमित संचालन से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा। उत्तराखंड और सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे रोजगार और व्यापार को भी मजबूती मिलने की संभावना है।