नई दिल्ली – कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद के विशेष सत्र और महिला आरक्षण कानून को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह विशेष सत्र विपक्ष को भरोसे में लिए बिना बुलाया गया है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
सर्वदलीय बैठक की मांग
खरगे ने सुझाव दिया कि यदि सरकार सच में लोकतंत्र को मजबूत करना चाहती है, तो 29 अप्रैल के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस पूरे मुद्दे पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए।
जल्दबाजी और राजनीतिक मंशा का आरोप
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में लिखा कि सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को जल्दबाजी में लागू करना चाहती है, जिसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा नजर आती है। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष से सहयोग तो मांग रही है, लेकिन सबसे अहम मुद्दे-डिलिमिटेशन-पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही।
सरकार की मंशा पर उठे सवाल
खरगे ने याद दिलाया कि यह कानून सितंबर 2023 में संसद से सर्वसम्मति से पास हुआ था और उस समय कांग्रेस ने इसके तत्काल लागू करने की मांग की थी। लेकिन अब करीब 30 महीने बाद विशेष सत्र बुलाना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का यह दावा सही नहीं है कि उसने सभी दलों से इस मुद्दे पर चर्चा की है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि चुनाव खत्म होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि डिलिमिटेशन और संवैधानिक बदलावों पर विस्तार से चर्चा हो सके।
चुनाव के बीच सत्र पर आपत्ति
मल्लिकार्जुन खरगे ने चिंता जताई कि संसद का विशेष सत्र ऐसे समय बुलाया गया है जब कई राज्यों में चुनाव चल रहे हैं। इससे यह संदेश जाता है कि सरकार महिला आरक्षण को जल्द लागू कर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।
पुराने फैसलों का हवाला
खरगे ने नोटबंदी, GST, जनगणना और राज्यों से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए कहा कि इन मामलों में सरकार का रिकॉर्ड भरोसा पैदा नहीं करता। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन का असर केंद्र और राज्यों दोनों पर पड़ेगा, इसलिए सभी की राय लेना जरूरी है।
16-18 अप्रैल तक विशेष सत्र
दरअसल, सरकार 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने जा रही है, जिसमें महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़े बिल लाए जा सकते हैं। साथ ही लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने और उनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की तैयारी भी चर्चा में है। इसी को लेकर अब राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और विपक्ष सरकार पर जल्दबाजी और राजनीति करने का आरोप लगा रहा है।