कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में परिवहन का एक लोकप्रिय साधन 'उबर शटल' (Uber Shuttle) आज से इतिहास बन गया है। मार्च 2024 में शुरू हुई इस ऐप-आधारित बस सेवा को ठीक दो साल बाद, यानी 2 अप्रैल, 2026 से पूरी तरह बंद कर दिया गया है। कंपनी के इस अचानक फैसले से शहर के आईटी प्रोफेशनल्स और रोज़ाना ऑफिस जाने वाले यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया है।
तेजी से बढ़ी थी लोकप्रियता, अब अचानक लगा ब्रेक
बता दें कि उबर शटल ने मार्च 2024 में महज 60 बसों के साथ अपना सफर शुरू किया था। आरामदायक सफर और किफायती दाम के कारण एक साल के भीतर ही बसों की संख्या बढ़कर 160 हो गई थी। आंकड़ों के मुताबिक, कोलकाता में हर महीने करीब 17 लाख बुकिंग्स इस ऐप के जरिए की जा रही थीं।
क्यों परेशान हैं यात्री?
सोशल मीडिया पर सुबह से ही यात्रियों का गुस्सा और चिंता साफ देखी जा रही है। विशेषकर न्यू टाउन और साल्टलेक सेक्टर-५ में काम करने वाले आईटी कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
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किफायती विकल्प का खत्म होना: सुबह ७ बजे की शिफ्ट के लिए ऐप-कैब का किराया काफी ज्यादा होता है, जबकि उबर शटल एक सस्ता और सुगम विकल्प था।
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आराम और सुरक्षा: इन वातानुकूलित (AC) बसों में 19 से 50 सीटें होती थीं और खड़े होकर यात्रा करने की अनुमति नहीं थी।
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समय की पाबंदी: यह सेवा सुबह 6 बजे से शुरू हो जाती थी, जो शुरुआती शिफ्ट वाले कर्मचारियों के लिए वरदान साबित हो रही थी।
"हमें सुबह 7 बजे ऑफिस पहुँचना होता है। उबर शटल की वजह से सफर आसान था, लेकिन अब समझ नहीं आ रहा कि ऑफिस कैसे जाएंगे।" — पुण्यव्रत बसु एवं राखी सेनगुप्ता (आईटी कर्मचारी)
बस मालिकों और चालकों पर भी संकट
सेवा बंद होने का असर सिर्फ यात्रियों पर ही नहीं, बल्कि बस मालिकों पर भी पड़ा है। ऑनलाइन ऐप कैब ऑपरेटर्स गिल्ड के महासचिव इंद्रनील बंद्योपाध्याय ने कहा:
"शुरुआत में कंपनी ने ड्राइवरों को भारी बोनस दिया था। कई लोगों ने कंपनी के भरोसे पर महंगी 'हाई-एंड' बसें खरीदी थीं। अब अचानक सेवा बंद होने से बस मालिक और चालक दोनों सड़क पर आ गए हैं।"
बंद होने का क्या है कारण?
हालांकि, उबर की ओर से सेवा बंद करने के पीछे का कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि:
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मुनाफे की कमी: भारी निवेश के बावजूद उम्मीद के मुताबिक लाभ न होना।
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फंडिंग की समस्या: कंपनी के आंतरिक फंड प्रबंधन में चुनौतियां।