दुनिया में बढ़ती प्राकृतिक गैस की कीमतों और वैश्विक अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडर बुकिंग को लेकर अहम फैसला लिया है। सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है। इस कदम का उद्देश्य जमाखोरी को रोकना और बाजार में आपूर्ति को संतुलित बनाए रखना है।
मिडिल ईस्ट तनाव के कारण बढ़ी मांग
अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। इससे घबराहट में सिलेंडर बुकिंग बढ़ने लगी, जिसके कारण एलपीजी की मांग में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे हालात में आपूर्ति को व्यवस्थित रखने के लिए यह फैसला लिया गया है।
देश में एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि देश में फिलहाल एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। आमतौर पर एक परिवार साल में 14.2 किलोग्राम के लगभग 7 से 8 सिलेंडर का उपयोग करता है और सामान्य तौर पर छह सप्ताह से पहले सिलेंडर रिफिल कराने की जरूरत नहीं पड़ती।
फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियां फिलहाल लागत का दबाव खुद वहन करेंगी।
74 दिनों का कच्चे तेल का भंडार
केंद्र सरकार ने संसद को बताया कि भारत के पास वर्तमान में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का कुल 74 दिनों का भंडारण उपलब्ध है। यह भंडार भू-राजनीतिक संकट या आपूर्ति में बाधा जैसी परिस्थितियों में देश की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की जानकारी
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में बताया कि भारत ने 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तैयार किए हैं। यह भंडार लगभग 9.5 दिनों की कच्चे तेल की जरूरत पूरी कर सकता है। इसके अलावा तेल विपणन कंपनियों के पास 64.5 दिनों का अतिरिक्त भंडारण भी उपलब्ध है, जिससे कुल राष्ट्रीय क्षमता 74 दिनों तक पहुंच जाती है।