मुम्बई. देशभर में घरेलू एलपीजी सिलेंडर वितरण को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से तेल कंपनियों ने OTP आधारित डिजिटल ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू किया था। इस व्यवस्था के तहत अब उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर प्राप्त करने के लिए मोबाइल पर आने वाले OTP का सत्यापन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का तर्क है कि इससे फर्जी डिलीवरी, कालाबाजारी और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों पर रोक लगेगी, लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था अब बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है।
गांवों और दूरदराज इलाकों में बढ़ीं मुश्किलें
ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमजोर स्थिति ने इस नई व्यवस्था को आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बना दिया है। कई गांवों में उपभोक्ताओं को समय पर OTP नहीं मिल पा रहा, जिसके कारण गैस सिलेंडर की डिलीवरी घंटों और कई बार दिनों तक अटक रही है। बुजुर्ग, तकनीक से अनभिज्ञ लोग और सीमित मोबाइल सुविधाओं वाले परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि रसोई गैस जैसी आवश्यक सेवा को पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया से जोड़ना व्यावहारिक कठिनाइयों को बढ़ा रहा है।
हाई कोर्ट पहुंचा मामला
एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (इंडिया) के अध्यक्ष द्वारा दायर याचिका में इस पूरी व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गईं। याचिका में कहा गया कि तकनीकी खामियों, सर्वर फेल होने और कमजोर नेटवर्क की वजह से डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार डिलीवरी एजेंट घंटों तक उपभोक्ता के घर पर OTP आने का इंतजार करते हैं, जिससे वितरण प्रक्रिया प्रभावित होती है और अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।
अदालत ने सरकार से मांगा जवाब
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और तेल कंपनियों को इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया। अदालत ने विशेष रूप से यह सवाल उठाया कि क्या देश के हर हिस्से में डिजिटल व्यवस्था को समान रूप से लागू करना व्यावहारिक है। अदालत ने ऑफलाइन बुकिंग और बिना OTP डिलीवरी जैसे वैकल्पिक विकल्पों को जारी रखने की संभावना पर विचार करने को कहा है, ताकि ग्रामीण उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
धीरे-धीरे बढ़ाया गया डिजिटल नियंत्रण
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि शुरुआत में यह डिजिटल सत्यापन केवल 50 प्रतिशत डिलीवरी तक सीमित था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया गया। अप्रैल 2026 में जारी निर्देश के बाद 100 प्रतिशत डिलीवरी को OTP आधारित सत्यापन से जोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, बिना डिजिटल सत्यापन के सिलेंडर वितरण करने पर डिस्ट्रीब्यूटर्स के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। इससे गैस एजेंसियों पर दबाव और बढ़ गया है।
तकनीक और जमीनी हकीकत के बीच संघर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल इंडिया की दिशा में बढ़ते कदम जरूरी हैं, लेकिन ऐसी सेवाओं में जहां आम नागरिकों की दैनिक जरूरतें जुड़ी हों, वहां तकनीक और जमीनी वास्तविकताओं के बीच संतुलन बनाना भी उतना ही जरूरी है। ग्रामीण भारत में अभी भी बड़ी आबादी सीमित डिजिटल संसाधनों और कमजोर नेटवर्क पर निर्भर है। ऐसे में पूरी तरह तकनीकी व्यवस्था लागू करना कई परिवारों के लिए बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच को कठिन बना सकता है।