नई दिल्ली। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमे की अनुमति देने पर राज्य सरकार जल्द फैसला ले। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विजय शाह के बयान को “जुबान फिसलने” का मामला बताया। उन्होंने कहा कि मंत्री का उद्देश्य कर्नल सोफिया की प्रशंसा करना था, लेकिन शब्दों का चयन गलत हो गया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट इस दलील से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया।
सीजेआई ने एसआईटी रिपोर्ट का दिया हवाला
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान एसआईटी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि विजय शाह पहले भी विवादित बयान देते रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर बयान गलती से दिया गया था तो तुरंत और स्पष्ट माफी दी जानी चाहिए थी। विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि मंत्री ने अगले ही दिन यानी 13 मई 2025 को माफी मांग ली थी, लेकिन अदालत ने इस तर्क पर ज्यादा सहमति नहीं जताई।
क्या है पूरा मामला?
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इस दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी सेना की प्रवक्ता के रूप में सामने आई थीं। 12 मई 2025 को एक कार्यक्रम में विजय शाह ने बयान दिया था कि देश ने आतंकियों से बदला लेने के लिए “आतंकियों की बहन” को भेजा है। इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया और मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।
हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई थी एफआईआर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस बयान पर स्वतः संज्ञान लेते हुए विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद मंत्री ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए तीन आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी गठित की थी। इस टीम में प्रमोद वर्मा, कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह शामिल हैं।
सरकार की अनुमति पर अटका मामला
एसआईटी ने अदालत को बताया कि बीएनएस की धारा 196 के तहत मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी है। जांच एजेंसी ने सरकार से अनुमति मांगी थी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार से जल्द फैसला लेने को कहा है।