हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। प्रत्येक एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी या अचला एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
कब है अपरा एकादशी?
- वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि:
- आरंभ: 12 मई दोपहर 2:52 बजे
- समापन: 13 मई दोपहर 1:29 बजे
- उदया तिथि के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत 13 मई को रखा जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
- भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ समय:
- सुबह 5:32 बजे से सुबह 8:55 बजे तक
- इस दौरान पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।
अपरा एकादशी पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थल को साफ कर लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- देसी घी का दीपक जलाकर फूल और माला अर्पित करें।
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी) से भगवान का अभिषेक करें।
- सात्विक भोग अर्पित करें।
- पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
व्रत का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से किया गया अपरा एकादशी व्रत जीवन में सुख, शांति, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। अगले दिन विधि-विधान से व्रत का पारण किया जाता है।