स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात ने इस रणनीतिक जलडमरूमध्य को बेहद संवेदनशील बना दिया है। मुंबई स्थित इंडियन नेशनल शिपओनर्स एसोसिएशन के मुख्य कार्यकारी अनिल देवली के अनुसार, रास्ता तकनीकी रूप से खुला जरूर है, लेकिन वास्तविक स्थिति बेहद जोखिमपूर्ण बनी हुई है। इसी वजह से भारत के 14 जहाज अब भी इस समुद्री क्षेत्र में फंसे हुए हैं और सामान्य समुद्री यातायात लगभग ठप पड़ चुका है।
भारतीय जहाजों पर हमले ने बढ़ाया डर
हालात उस समय और गंभीर हो गए जब 18 अप्रैल को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की नौकाओं द्वारा दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर गोलीबारी की घटना सामने आई। इस हमले के बाद भारतीय नाविकों और जहाज संचालकों का भरोसा पूरी तरह डगमगा गया। समुद्री क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव अब सीधे सुरक्षा संकट में बदलता दिखाई दे रहा है। भारतीय जहाजों के कप्तानों और चालक दल के बीच इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि कहीं दोबारा हमला या गोलीबारी न हो जाए।
कप्तानों की रेडियो गुहार ने बढ़ाई चिंता
समुद्री संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जहाजों के कप्तान लगातार रेडियो के जरिए ईरानी सुरक्षा बलों से सुरक्षित मार्ग देने की गुहार लगा रहे हैं। एक कप्तान की यह अपील कि “आपने खुद मुझे सुरक्षित घोषित किया है” अब इस पूरे संकट का प्रतीक बन चुकी है। यह स्थिति बताती है कि समुद्री रास्ता खुला होने के बावजूद जहाजों की आवाजाही कितनी असुरक्षित और अनिश्चित बनी हुई है।
कुछ जहाजों को मिल रही विशेष अनुमति
रिपोर्टों के मुताबिक कुछ तटस्थ ध्वज वाले जहाज ईरान की मौन सहमति या अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा के सहारे आवाजाही कर पा रहे हैं। हालांकि यह सामान्य व्यापारिक गतिविधि नहीं मानी जा रही। जो जहाज निकल भी रहे हैं, वे भारी जोखिम और अनिश्चित समय के बीच सफर तय कर रहे हैं। शुरुआती दिनों में कुछ भारतीय जहाजों के सुरक्षित निकलने से भरोसा बढ़ा था, लेकिन हालिया गोलीबारी की घटनाओं ने हालात फिर तनावपूर्ण बना दिए।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
भारत सरकार ने भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर ईरानी राजदूत से संपर्क किया है। इसके बावजूद समुद्री क्षेत्र में मौजूद भारतीय चालक दल मानसिक दबाव और भय के माहौल में काम कर रहे हैं। पिछले महीने जब क्षेत्र में तनाव चरम पर था, तब जहाजों पर भोजन, ईंधन और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई थी। इससे समुद्र में फंसे नाविकों की स्थिति और कठिन हो गई थी।
वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार गुजरता है। ऐसे में यहां उत्पन्न अस्थिरता का असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। बीमा लागत बढ़ने, शिपमेंट में देरी और जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकला, तो यह संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।