मेजर अभिलाषा बराक को मिला ‘संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड’ विश्व स्तर पर अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है। यह सम्मान उन सैन्य अधिकारियों को दिया जाता है जिन्होंने शांति अभियानों में लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण और समावेशी नेतृत्व को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि आधुनिक शांति अभियानों की सफलता केवल सैन्य शक्ति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि स्थानीय समुदायों, महिलाओं और कमजोर वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी आधारित होती है। इसी दिशा में मेजर बराक का कार्य वैश्विक स्तर पर सराहा गया है।
कौन हैं मेजर अभिलाषा बराक?
हरियाणा की बेटी मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में इतिहास रच चुकी हैं। उन्होंने उस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई, जिसे लंबे समय तक पुरुष प्रधान माना जाता रहा। कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और उत्कृष्ट पेशेवर क्षमता के बल पर उन्होंने भारतीय सेना में एक नई मिसाल स्थापित की। उनकी उपलब्धियां केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देशभर की युवा महिलाओं के लिए यह संदेश भी देती हैं कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। आज वे भारतीय सशस्त्र बलों में महिला नेतृत्व के सबसे प्रेरणादायक चेहरों में गिनी जाती हैं।
लेबनान में निभा रहीं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
वर्तमान में मेजर अभिलाषा बराक संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल इन लेबनान के तहत लेबनान में एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में सेवा दे रही हैं। उनकी जिम्मेदारी केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों, विशेषकर महिलाओं के साथ संवाद स्थापित करना, उनकी समस्याओं को समझना और शांति प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना भी शामिल है। लेबनान को संयुक्त राष्ट्र के सबसे चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील शांति मिशनों में से एक माना जाता है, ऐसे में वहां उत्कृष्ट नेतृत्व का प्रदर्शन करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दी विशेष बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेजर बराक को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी उत्कृष्ट सेवा और समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि मेजर बराक की उपलब्धि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत के लंबे और गौरवशाली योगदान को भी दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि उनकी सफलता देश की लाखों बेटियों को प्रेरित करेगी, जो समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं। यह संदेश महिला सशक्तिकरण और समान अवसरों की दिशा में भारत की सोच को भी प्रतिबिंबित करता है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी की सराहना
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पुरस्कार प्रदान करते समय मेजर बराक के योगदान की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मेजर बराक उन सभी लोगों के लिए आदर्श हैं जिनके साथ वे काम करती हैं और जिनकी सेवा करती हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उन्होंने न केवल अपने कर्तव्यों का उत्कृष्ट निर्वहन किया बल्कि महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए भी उल्लेखनीय प्रयास किए। उनकी कार्यशैली ने यह साबित किया है कि समावेशी दृष्टिकोण शांति स्थापना की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बना सकता है।
“सपनों का कोई जेंडर नहीं होता”
सम्मान प्राप्त करने के बाद मेजर अभिलाषा बराक का वक्तव्य भी व्यापक चर्चा का विषय बना। उन्होंने कहा कि सपनों का कोई जेंडर नहीं होता, न ही नेतृत्व, साहस और मानवता की सेवा करने की इच्छा का कोई जेंडर होता है। उनका यह संदेश केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थायी शांति तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग की आवाज सुनी जाए और सभी को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। उनके विचार आधुनिक नेतृत्व और समावेशी विकास की अवधारणा को मजबूत करते हैं।
वैश्विक मंच पर बढ़ रही भारतीय महिलाओं की पहचान
मेजर अभिलाषा बराक का यह सम्मान भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि भारतीय महिलाएं अब केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी नेतृत्व की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। सेना, विज्ञान, अंतरिक्ष, खेल और कूटनीति जैसे क्षेत्रों में भारतीय महिलाओं की उपलब्धियां लगातार बढ़ रही हैं। मेजर बराक की सफलता इस परिवर्तनशील भारत की तस्वीर प्रस्तुत करती है, जहां प्रतिभा और क्षमता को जेंडर के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्धियों के आधार पर पहचाना जा रहा है। उनका यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और भारतीय महिला शक्ति के लिए गर्व का विषय बन गया है।