कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर से सड़क की राजनीति पर लौटने जा रही हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी आगामी 2 जून को कोलकाता के धर्मतला इलाके में एक बड़े धरना प्रदर्शन में शामिल होंगी। चुनाव नतीजों के बाद यह पहला मौका होगा जब ममता बनर्जी खुद जमीन पर उतरकर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगी।
रानी रासमणि रोड पर धरने की तैयारी, पुलिस अनुमति का इंतजार
टीएमसी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह धरना प्रदर्शन राज्य में चुनाव के बाद हो रही कथित हिंसा (Post-Poll Violence), टीएमसी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों और रेलवे स्टेशनों से हॉकरों (फेरीवालों) को अवैध रूप से हटाए जाने के विरोध में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम सुबह 10 बजे से शुरू होगा और दोपहर के समय ममता बनर्जी खुद मंच पर शामिल होंगी। हालांकि, इस विरोध प्रदर्शन के लिए अभी तक पुलिस की लिखित अनुमति नहीं मिली है। यदि अनुमति मिल जाती है, तो कोलकाता की रानी रासमणि रोड पर यह दिनभर का धरना कार्यक्रम चलेगा, जिसमें टीएमसी के तमाम बड़े नेता शामिल होंगे।
"हम जनता के वोट से नहीं हारे, पासा पलटा गया है"
विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को केवल 80 सीटों पर जीत मिली है, जबकि भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ राज्य में नई सरकार बनाई है। हाल ही में हुए फलता विधानसभा उपचुनाव में भी भाजपा ने भारी अंतर से जीत दर्ज की है।
इस करारी हार के बाद फेसबुक लाइव के जरिए ममता बनर्जी ने ईवीएम (EVM) पर गंभीर सवाल खड़े किए। अपने पुराने रुख पर अड़े रहते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया, "टीएमसी जनता के वोट से नहीं हारी है। हमें 220 से 230 सीटें मिलनी चाहिए थीं, लेकिन कम से कम 150 सीटों पर चुनावी पासा पलटा गया है। हमारे पोलिंग एजेंटों को केंद्रों से बाहर निकाल दिया गया और हमारी निश्चित जीत वाली सीटों पर हमें जानबूझकर हरा दिया गया। हमें ईवीएम मशीनों की पूरी रिपोर्ट चाहिए।"
वर्तमान सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
नवनिर्वाचित सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा, "आपने बंगाल को लूटा है, याद रखिए आपकी दिल्ली भी हाथ से चली जाएगी। चुनाव जीतने के बाद हमारे 2 से 2.5 हजार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है, पार्टी दफ्तर तोड़े जा रहे हैं और गरीब हॉकरों की रोजी-रोटी छीनी जा रही है। अगर आप सच में चुनाव जीते होते, तो इस तरह का अत्याचार नहीं करते। आज राज्य में डर का माहौल है, कोई अपनी नौकरी तो कोई अपने व्यापार को लेकर डरा हुआ है।"
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस धरने के जरिए ममता बनर्जी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल वापस बढ़ाने और नई सरकार के खिलाफ फ्रंट फुट पर आकर राजनीति करने की रणनीति बना रही हैं।