नई दिल्ली. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना ने अब वास्तविक रफ्तार पकड़ ली है। इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर का लगभग अस्सी प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है जिससे पूरे देश में इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर उत्साह बढ़ गया है। नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी एनएचएसआरसीएल और भारतीय रेलवे मिलकर इस मार्ग को तैयार कर रहे हैं। परियोजना की प्रारंभिक लागत एक लाख दस हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी लेकिन अब यह बढ़कर लगभग दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। शुरुआती ऋण बहुत रियायती दर यानी मात्र शून्य दशमलव पच्चीस प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध था। बढ़ी हुई लागत को पूरा करने के लिए सरकार अब भी रियायती दरों पर अतिरिक्त ऋण लेने की दिशा में काम कर रही है जिससे परियोजना की वित्तीय व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
किराए का अनुमान और संभावित बढ़ोतरी
मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन का किराया शुरू में तीन हजार रुपये के आसपास आंका गया था। परियोजना की लागत में हुई वृद्धि और अन्य खर्चों को देखते हुए अब यह किराया छह हजार से सात हजार रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी तक कोई अंतिम और सटीक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है क्योंकि कई तकनीकी और परिचालन संबंधी बातें अभी तय होनी बाकी हैं। अगले वर्ष अप्रैल-मई से इस मार्ग पर ट्रायल रन शुरू होने वाले हैं जिससे किराए और सेवा की वास्तविक तस्वीर और साफ होगी। पंद्रह अगस्त दो हजार सत्ताईस को सूरत से विलिमोरा के बीच एक खंड का औपचारिक उद्घाटन किए जाने की योजना है जिससे यात्री सेवा की शुरुआत का संकेत मिलता है।
दो अलग-अलग श्रेणी की बुलेट ट्रेनें चलेंगी
इस कॉरिडोर पर एक ही तरह की नहीं बल्कि दो अलग-अलग श्रेणी की बुलेट ट्रेनें संचालित की जाएंगी। एक श्रेणी रैपिड सेवा होगी जो केवल प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी जबकि दूसरी लोकल सेवा होगी जो मार्ग के सभी स्टेशनों पर ठहराव करेगी। यह व्यवस्था दिल्ली-वाराणसी सहित अन्य प्रस्तावित हाई स्पीड मार्गों पर भी अपनाई जा सकती है। जापान से तीन सौ पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन की आपूर्ति में हुई देरी के बाद भारत ने स्वयं इतनी ही गति वाली स्वदेशी ट्रेन विकसित करने का निर्णय लिया है। यह मेड इन इंडिया ट्रेन ई-10 श्रेणी की होगी और वर्ष दो हजार तीस तक पटरी पर उतरने की संभावना है जिससे आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम आगे बढ़ेगा।
रैपिड बुलेट ट्रेन की विशेषताएं और समय बचत
रैपिड बुलेट ट्रेन कम स्टेशनों पर ठहराव वाली सेवा होगी जो मुख्य व्यावसायिक केंद्रों को तेजी से जोड़ेगी। यह ट्रेन साबरमती, वडोदरा, सूरत और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स यानी बीकेसी जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ही रुकेगी। पूरे पांच सौ आठ किलोमीटर के सफर को यह ट्रेन मात्र दो घंटे सात मिनट में पूरा कर लेगी जिससे व्यवसायिक यात्रियों को भारी समय की बचत होगी। बड़े शहरों और व्यापारिक केंद्रों के बीच तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के कारण इस सेवा का किराया अपेक्षाकृत अधिक रखा जा सकता है। रैपिड सेवा से मुंबई और अहमदाबाद के बीच की दूरी व्यावहारिक रूप से बहुत कम हो जाएगी और दिन में कई चक्कर लगाए जा सकेंगे।
लोकल बुलेट ट्रेन से मिलेगी व्यापक कनेक्टिविटी
लोकल बुलेट ट्रेन मार्ग के सभी स्टेशनों पर रुकेगी जिससे छोटे शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों के यात्रियों को भी हाई स्पीड सुविधा का लाभ मिलेगा। हालांकि इसकी अधिकतम गति तीन सौ बीस किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित रहेगी। हर स्टेशन पर ठहराव, प्रतीक्षा और फिर रफ्तार पकड़ने के कारण कुल यात्रा समय लगभग तीन घंटे का होगा। इस सेवा में साबरमती, कालूपुर, आनंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, विलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई के बीकेसी सहित कुल बारह स्टेशन शामिल हैं। वापी, भरूच, विरार और ठाणे जैसे औद्योगिक व आवासीय क्षेत्रों के यात्री अब हाई स्पीड नेटवर्क से जुड़ सकेंगे जिससे क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।
स्वदेशी ई-10 ट्रेन की तैयारी और भविष्य की राह
जापान से उच्च गति वाली ट्रेन की आपूर्ति में देरी के बाद भारत ने तीन सौ पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली स्वदेशी ई-10 बुलेट ट्रेन बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं। यह ट्रेन पूर्णतः मेड इन इंडिया होगी और वर्ष दो हजार तीस तक मुंबई-अहमदाबाद मार्ग पर दौड़ने की संभावना है। स्वदेशी ट्रेन के आने से न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी बल्कि रखरखाव और भविष्य के विस्तार में भी आसानी होगी। पूरे कॉरिडोर के संचालन के साथ ही देश के अन्य हाई स्पीड मार्गों के लिए भी यह अनुभव आधार बनेगा। परियोजना पूरी तरह से शुरू होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा और देश की रेल व्यवस्था में एक नई ऊंचाई जुड़ेगी।