वाराणसी. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रदर्शन को लेकर उन पर बृहस्पतिवार को निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनकी अराजकतावादी मानसिकता है तथा वह समाज में जहर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। नवीन की यह टिप्पणी कांग्रेस नेता द्वारा बुधवार को इंडिया गठबंधन के नेताओं के प्रदर्शन का नेतृत्व करने और पुलिस द्वारा कई सांसदों के साथ उन्हें हिरासत में लिए जाने के बाद आई। नवीन ने कहा कि मैं केवल इतना कह सकता हूं कि उनकी मानसिकता अराजकतावादी है और वे समाज में जहर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर उन्हें ऐसी आपत्ति थी तो केरल में भी चुनाव उसी निर्वाचन आयोग ने कराए थे। तमिलनाडु में भी चुनाव उसी निर्वाचन आयोग ने कराए थे जहां वे सत्ता में आए हैं।
इस्तीफे की चुनौती और घुसपैठ का आरोप
उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी में हिम्मत है तो उन्हें पहले इस्तीफा देना चाहिए। लोग देख रहे हैं कि वह किस तरह यह खेल खेल रहे हैं। नवीन ने नेता प्रतिपक्ष पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो लोग अलग-अलग जगहों से भारत आते हैं और यहां के लोगों के अधिकार छीनते हैं उनका विरोध किया जा रहा है। मेरा मानना है कि भारत के लोगों का देश के संसाधनों संपत्ति और जमीन पर अधिकार है। हम घुसपैठियों को इन अधिकारों पर दावा नहीं करने देंगे। नवीन ने कहा कि भाजपा भारत में विदेशी मानसिकता वाले लोगों को बसाने की किसी भी कोशिश का हमेशा विरोध करेगी।
एसआईआर और आयोग का बचाव
कांग्रेस द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक खबर के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। खबर में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। इनमें से ज्यादातर आपत्तियां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों को लेकर थीं। अपने दो चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे निर्वाचन आयोग का कहना है कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना सामान्य बात है तथा उसके सभी आदेशों को पूर्ण कानूनी समर्थन प्राप्त है और वे स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
नितिन नवीन के बयान ने विपक्ष के प्रदर्शन और निर्वाचन आयोग को लेकर चल रहे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। भाजपा अध्यक्ष ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए केरल और तमिलनाडु के चुनावों का हवाला दिया जहां आयोग की प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाए गए। घुसपैठियों के मुद्दे को जोड़ते हुए उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और संसाधनों पर देशवासियों के अधिकार की बात कही। कांग्रेस की ओर से SIR प्रक्रिया और आयोग के आंतरिक मतभेदों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
आयोग की स्थिति और आगे की बहस
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि आंतरिक चर्चा में अलग राय सामान्य है और सभी फैसले कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हैं। राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी है। नितिन नवीन के बयान से भाजपा का रुख साफ हो गया है कि वह आयोग की प्रक्रियाओं का समर्थन करती है और विपक्ष के प्रदर्शन को अराजकता फैलाने वाला मानती है। पूरे विवाद में लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता केंद्र में बनी हुई है।