राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मेघालय, त्रिपुरा और मणिपुर के लोगों को उनके राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। ये तीनों राज्य वर्ष 1972 में पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम के लागू होने के बाद पूर्ण राज्य बने थे। यह दिन केवल प्रशासनिक इतिहास का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पहचान, आत्मसम्मान और विकास यात्रा का प्रतीक है।
सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक वैभव की सराहना
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में इन राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जीवंत परंपराओं और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का उल्लेख किया। मेघालय की हरियाली, त्रिपुरा की ऐतिहासिक विरासत और मणिपुर की सांस्कृतिक गहराई भारत की विविधता को और सशक्त बनाती है। पूर्वोत्तर भारत की यही विशेषता उसे राष्ट्रीय चेतना में विशिष्ट स्थान दिलाती है।
उद्यमिता और प्रतिभा का राष्ट्रीय योगदान
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इन राज्यों के उद्यमी और प्रतिभाशाली लोगों ने देश की प्रगति में उल्लेखनीय योगदान दिया है। चाहे खेल हो, कला, शिक्षा या उद्यमिता—पूर्वोत्तर के नागरिकों ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी पहचान बनाई है और भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शांति और समृद्धि की कामना
अपने संदेश में राष्ट्रपति ने इन राज्यों के निवासियों के लिए शांति और समृद्धि से भरे भविष्य की कामना की। यह संदेश विशेष रूप से ऐसे समय में आया है, जब पूर्वोत्तर के कुछ हिस्से सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। राष्ट्रपति का यह वक्तव्य संवैधानिक आश्वासन और नैतिक समर्थन दोनों का संकेत देता है।
मणिपुर की संवेदनशील स्थिति
इस अवसर पर मणिपुर की वर्तमान स्थिति भी राष्ट्रीय चेतना में बनी हुई है। मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा में इंफाल घाटी के मेइती समुदाय और पहाड़ी क्षेत्रों के कुकी-जो समूहों के बीच टकराव में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। फरवरी 2024 से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है, जो शांति बहाली की संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
एकता और विश्वास का संदेश
राज्य स्थापना दिवस पर राष्ट्रपति का संदेश केवल शुभकामना नहीं, बल्कि एकता, विश्वास और समावेशी विकास का आह्वान है। यह पूर्वोत्तर के लोगों को यह भरोसा दिलाता है कि उनकी संस्कृति, संघर्ष और योगदान को राष्ट्र पूरी गंभीरता और सम्मान के साथ देखता है।
Comments (0)