पूर्वोत्तर भारत तक तेज, सुरक्षित और सतत रेल पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेल नई तकनीक और आधुनिक ढांचे के अनुरूप इस भूमिगत परियोजना को आगे बढ़ा रही है। पश्चिम बंगाल के संवेदनशील गलियारे में प्रस्तावित 40 किलोमीटर लंबी भूमिगत रेल लाइन मौजूदा मार्ग को चार-लाइन कॉरिडोर में परिवर्तित करेगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि यह योजना राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पूर्वोत्तर राज्यों तक आवागमन की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
पूर्वोत्तर और असम के लिए ऐतिहासिक बजट आवंटन
केंद्र सरकार ने इस वर्ष के रेल बजट में असम और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 11,486 करोड़ रुपये का अभूतपूर्व आवंटन किया है। यह बजट रेल लाइनों के विस्तार, स्टेशनों के आधुनिकीकरण, सुरक्षा प्रणालियों के सुदृढ़ीकरण और पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंगों व पुलों जैसे कठिन निर्माण कार्यों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र बुनियादी ढांचे की किसी भी कमी के कारण विकास से पीछे न रह जाए।
लगातार प्रगति पर चल रही विशाल रेलवे परियोजनाएँ
रेल मंत्री ने यह भी बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में वर्तमान समय में 72,468 करोड़ रुपये मूल्य की कई प्रमुख परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इन परियोजनाओं का फोकस कठिन भूगोल वाले क्षेत्रों में सुरक्षित तथा टिकाऊ रेल नेटवर्क बनाना है, जिससे माल ढुलाई और यात्री परिवहन दोनों में दक्षता बढ़े। यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बल्कि क्षेत्रीय संपर्कता को स्थायी रूप से बेहतर बनाएगा।
असम और पूर्वोत्तर में रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार
वर्ष 2014 के बाद से असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में लगभग 1,900 किलोमीटर नए रेलमार्ग बिछाए गए हैं, जो स्वयं में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह विस्तार इतना बड़ा है कि यह श्रीलंका के पूरे रेल नेटवर्क से भी अधिक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को मुख्य भारत के साथ जोड़ने को प्राथमिकता में रखा है और वहां की कनेक्टिविटी को आधुनिक रूप देने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।
कनेक्टिविटी के भविष्य को आकार देती नई पहल
40 किलोमीटर भूमिगत रेल मार्ग की यह योजना केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की परिवहन प्रणाली को 21वीं सदी के मानकों के अनुरूप तैयार करने का एक दृष्टिकोण है। यह सुरक्षित यात्रा, निर्बाध संचालन और भविष्य की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगी। इस परियोजना से पर्यटन, व्यापार, रक्षा और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और पूर्वोत्तर भारत देश की प्रगति की मुख्यधारा में और प्रभावी रूप से शामिल होगा।
Comments (0)