नई दिल्ली - संसद के मानसून सत्र का नौवां दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बीच लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। दूसरी ओर राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा जारी रही। सदन में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के हितों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
हंगामे के बीच नहीं चल सकी लोकसभा
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे। लगातार शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और पीठासीन अधिकारी ने कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
राज्यसभा में कपिल सिब्बल ने सरकार से पूछे सवाल
राज्यसभा में निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल ने प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से पैलेट गन के इस्तेमाल के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की फायरिंग या पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ है, तो इसके पीछे किसी स्तर पर प्रशासनिक अनुमति जरूर रही होगी।
सिब्बल ने सवाल उठाया कि यदि किसी अधिकारी ने अनुमति दी थी तो सरकार ने अब तक उस पर क्या कार्रवाई की। उन्होंने गृह मंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को इस पूरे मामले पर स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।
भाजपा ने राहुल गांधी पर लगाए आरोप
भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से सदन की कार्यवाही लगातार बाधित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष सदन के बजाय बाहर प्रदर्शन की राजनीति कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे कई आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और इससे संसद की कार्यवाही प्रभावित हो रही है।
विधेयक पर जेएमएम सांसद ने दी जवाबदेही बढ़ाने की सलाह
लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए केवल कठोर कानून पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पारदर्शिता बढ़ाने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रावधान होने चाहिए जिनसे दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, लेकिन किसी भी निर्दोष व्यक्ति को कानून का अनावश्यक नुकसान न उठाना पड़े।
परीक्षा सुधार पर केंद्रित रही बहस
राज्यसभा में जारी चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने पेपर लीक रोकने, परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने और छात्रों का विश्वास मजबूत करने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर बल दिया। विधेयक पर चर्चा आगे भी जारी रहने की संभावना है।