प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत देशभर के किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, जो तीन किस्तों में सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। इस वर्ष होली का पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा और इसी शुभ अवसर से पहले सरकार 22वीं किस्त जारी करने की अंतिम तैयारियों में जुटी है। कृषि मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सरकार की इच्छा है कि त्योहार से पहले ही किस्त किसानों तक पहुँचे, ताकि वे अपने खेत-घर के काम और त्योहार की तैयारी आसानी से कर सकें। हालांकि आधिकारिक तारीख की घोषणा अभी शेष है, लेकिन मंत्रालय की गतिविधियाँ इस ओर संकेत करती हैं कि किसानों को अधिक इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।
देरी से मिली पिछली किस्त के साथ बढ़ेगी राशि
पीएम किसान योजना के लाभार्थियों में वे किसान भी शामिल हैं जिन्हें किसी कारणवश पिछली यानी 21वीं किस्त प्राप्त नहीं हो सकी थी। नवंबर में जारी की गई उस किस्त में कई खातों में तकनीकी खामियों, गलत बैंक विवरण या ई-केवाईसी अधूरी होने के कारण राशि जमा नहीं हो पाई थी। ऐसी स्थिति वाले किसानों के लिए इस बार होली का त्योहार विशेष होने वाला है, क्योंकि उन्हें पिछली किस्त के साथ नई किस्त भी एक साथ प्राप्त होगी। इस प्रकार पात्र किसानों के खातों में कुल 4,000 रुपये की राशि हस्तांतरित होगी, जो उनके लिए आर्थिक राहत का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
लाभार्थियों की संख्या और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
पीएम किसान योजना की प्रत्येक किस्त देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय गति भरती है। एक ही समय में करोड़ों किसानों के बैंक खातों में धन के प्रवाह से स्थानीय बाजारों में मांग बढ़ती है और कृषि उत्पादों से जुड़ी गतिविधियों में भी तेजी आती है। 22वीं किस्त का वितरण इस समय विशेष अर्थ रखता है, क्योंकि रबी फसलों का दौर चल रहा है और किसानों को खाद, बीज, सिंचाई और अन्य कृषि आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है। सरकार का उद्देश्य है कि यह सहायता किसानों को समय से मिलकर उनकी उत्पादन प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखे।
किस्त अटकने के प्रमुख कारण और पारदर्शिता पर जोर
पिछले कुछ समय से सरकार ने योजना में फर्जीवाड़े को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। किसान अक्सर जिस समस्या का सामना करते हैं, वह है बैंक खाते का आधार से न जुड़ा होना या ई-केवाईसी का लंबित रह जाना। इस बार भी जिन किसानों की यह औपचारिकताएँ पूरी नहीं हैं, उनके खातों में किस्त आने में बाधा उत्पन्न हो सकती है। साथ ही भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल सत्यापन भी अनिवार्य रखा गया है, ताकि केवल वास्तविक कृषक ही योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। इन सुधारों का उद्देश्य है कि धन सीधे और सही व्यक्ति तक पहुँचे तथा किसी भी प्रकार की त्रुटि या धोखाधड़ी की संभावना समाप्त हो।
समय पर दस्तावेज़ अद्यतन कराने की किसानों से अपील
सरकार लगातार किसानों से यह अपील करती आ रही है कि वे ई-केवाईसी पूर्ण करें, बैंक खाते को आधार से लिंक करें और अपने भूमि रिकॉर्ड पोर्टल पर अपडेट रखें। इन प्रक्रियाओं के पूरा होते ही किसान बिना अवरोध के हर किस्त समय पर प्राप्त कर सकते हैं। जिन किसानों की 21वीं किस्त अटकी हुई थी, उनके लिए यह कदम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इस बार उन्हें डबल भुगतान का लाभ मिल सकता है। यदि दस्तावेज़ों में कमी रह जाती है, तो लाभ मिलने में अनावश्यक देरी संभव है।
त्योहार से पहले किसानों के चेहरों पर उम्मीद की चमक
पीएम किसान योजना की यह किस्त न केवल वित्तीय सहायता है, बल्कि किसानों की मेहनत और योगदान के प्रति सरकार की मान्यता का प्रतीक भी है। होली जैसे रंगों के पर्व से पहले यह आर्थिक सहायता किसानों के लिए कई मायनों में लाभदायक साबित होगी। त्योहार की तैयारियों, घरेलू आवश्यकताओं और खेती-किसानी में होने वाले खर्चों के लिए यह राशि महत्वपूर्ण सहारा प्रदान करेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति देगी। सरकार की यह पहल किसानों की स्थिति को और मजबूत बनाने तथा उनकी आय में स्थायी वृद्धि के उद्देश्य की दिशा में एक और कदम मानी जा रही है।
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