उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दोनों नेताओं की तस्वीरें साझा करते हुए जानकारी दी कि यह सौजन्य भेंट थी। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी चुनावी तैयारी और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।
राम मंदिर की प्रतिकृति भेंट कर जताया आभार
मुलाकात के दौरान योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री को अयोध्या में नव–निर्मित श्रीराम मंदिर की एक सुंदर प्रतिकृति भेंट की। यह प्रतीकात्मक भेंट अयोध्या में हाल ही में संपन्न हुए ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा समारोह से भी जुड़ती है, जिसने पूरे देश में अध्यात्म और सांस्कृतिक भावनाओं को नई ऊर्जा दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सौजन्य gesture की सराहना की।
एक्स पर लिखा – PM का मार्गदर्शन सदैव प्रेरक
सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से शिष्टाचार भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। उन्होंने आगे लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी का पाथेय ‘नये उत्तर प्रदेश’ की विकास यात्रा को गति देता है और उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहता है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री का समय देने के लिए आभार व्यक्त किया।
चुनावी वर्ष में मुलाकात का खास महत्व
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब लगभग एक वर्ष का समय बचा है और इसी दौरान मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं भी तेज हो चुकी हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच हुई यह मुलाकात राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि विकास कार्यों, संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक संतुलन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई होगी।
विकास एजेंडा और सुशासन पर भी फोकस
बीते वर्षों में यूपी सरकार ने बुनियादी ढांचे, कानून-व्यवस्था और निवेश के क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी समय-समय पर इन पहलों की सराहना करते रहे हैं। इस मुलाकात को विकास यात्रा को और गति देने वाली पहल के रूप में भी देखा जा रहा है, जहां केंद्र और राज्य के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साझा संदेश
राम मंदिर की प्रतिकृति भेंट करने के पीछे यह संदेश भी झलकता है कि अयोध्या केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री, दोनों ही इसे राष्ट्रीय गौरव और सभ्यतागत विरासत के पुनर्जागरण से जोड़कर देखते हैं।
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