लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शहरी बुनियादी ढांचे की बदहाल स्थिति को लेकर सरकार और सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आज आम नागरिक की ज़िंदगी नारकीय हो चुकी है, जहां गंदगी, जलभराव और अव्यवस्था को सामान्य मान लिया गया है। यह स्थिति किसी एक शहर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के शहरी भारत की तस्वीर बनती जा रही है।
किराड़ी का वीडियो और जमीनी सच्चाई
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पत्रकार द्वारा साझा किया गया वीडियो पोस्ट किया, जिसमें दिल्ली के किराड़ी इलाके में घरों के सामने जमा पानी और कचरे की भयावह स्थिति दिखाई गई। इस वीडियो को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि यही वह सच्चाई है, जिसे सत्ता और सिस्टम लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं।
“सिस्टम बिक चुका है” — सत्ता पर सीधा आरोप
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि आज सिस्टम सत्ता के सामने पूरी तरह झुक चुका है। अधिकारी, नेता और संस्थाएं एक-दूसरे की पीठ थपथपाकर जनता को कुचलने में लगी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आम नागरिक की पीड़ा से किसी को सरोकार नहीं है, क्योंकि लालच ने संवेदनशीलता को खत्म कर दिया है।
लालच की महामारी और ‘न्यू नॉर्मल’ की खतरनाक सोच
कांग्रेस नेता के अनुसार, देश में लालच अब महामारी का रूप ले चुका है और शहरी सड़न इसका सबसे भयावह चेहरा है। उन्होंने कहा कि समाज इसलिए मर रहा है क्योंकि गंदगी, अव्यवस्था और अमानवीय हालात को हमने “न्यू नॉर्मल” मान लिया है। सुन्नता, चुप्पी और बेपरवाही आज की सबसे बड़ी बीमारी बन चुकी है।
जवाबदेही की मांग क्यों है जरूरी
राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि अगर आज जवाबदेही की मांग नहीं की गई, तो यह सड़न हर दरवाजे तक पहुंचेगी। उन्होंने आम जनता से सवाल उठाने, सिस्टम को कठघरे में खड़ा करने और बुनियादी सुविधाओं को अधिकार के रूप में मांगने की अपील की।
राजनीति से आगे सामाजिक चेतावनी
यह बयान केवल एक राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है। शहरी भारत में बढ़ती अव्यवस्था, कमजोर प्रशासन और जवाबदेही की कमी लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर सकती है। राहुल गांधी का यह हमला इसी खतरे की ओर इशारा करता है।
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