एक नई रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि बढ़ता तापमान और वायु प्रदूषण भारत के धान उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। खासकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में 2035 तक धान की पैदावार 15 से 75 प्रतिशत तक घट सकती है। वहीं, गंगा के मैदानी क्षेत्रों खासतौर पर पश्चिम बंगाल में धान उत्पादन स्थिर रहने की संभावना जताई गई है।
स्टडी में क्या सामने आया?
यह अध्ययन विद्यासागर युनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर और रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ प्रसेनजीत आचार्य के नेतृत्व में किया गया है। इसमें जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के संयुक्त प्रभावों का विस्तृत मैपिंग के जरिए विश्लेषण किया गया। शोध में यह पाया गया कि तापमान, वर्षा, सौर विकिरण, पार्टिकुलेट मैटर और ग्राउंड-लेवल ओजोन जैसे कारक धान की पैदावार को प्रभावित कर रहे हैं।
उत्तर भारत में बड़ा नुकसान संभव
अध्ययन के अनुसार-
पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी: 15% से 75% तक गिरावट
पूर्वी यूपी और बिहार: 25% तक गिरावट
विशेषज्ञों का कहना है कि 33°C से अधिक तापमान धान की फसल के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है।
बंगाल क्यों सुरक्षित?
रिसर्च में पाया गया कि पश्चिम बंगाल और गंगा के निचले इलाके अपेक्षाकृत स्थिर रह सकते हैं क्योंकि यहां—
प्रदूषण स्तर कम है
तापमान में अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होता
इसी कारण आने वाले वर्षों में पूर्वी भारत देश की धान आपूर्ति में और अहम भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों की राय
जवाहर लाल युनिवर्सिटी के प्रोफेसर एस. श्रीकेश के अनुसार, तापमान बढ़ने से फसल के विकास चरण प्रभावित होते हैं और पानी की अधिक कमी होती है। वहीं, सेंट्रल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों का कहना है कि 75% गिरावट का अनुमान पहले की तुलना में काफी अधिक है, लेकिन जलवायु परिवर्तन का असर वास्तविक है।
कुल मिलाकर चेतावनी
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो उत्तर भारत में खाद्य उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है और पूर्वी राज्यों पर निर्भरता और अधिक हो जाएगी।